Uttarakhand Teacher Recruitment Ban: शिक्षक भर्ती पर लगी तत्काल रोक, नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर गिरेगी गाज
Uttarakhand Teacher Recruitment Ban: उत्तराखंड के अशासकीय (Aided) स्कूलों में शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार ने इन स्कूलों में स्वीकृत पदों पर होने वाली भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। शिक्षा सचिव रविनाथ रमन द्वारा जारी किए गए (Government Recruitment Moratorium) के आदेश ने शिक्षा जगत में हड़कंप मचा दिया है। शासन का यह फैसला उन पदों पर लागू होगा जो पिछले तीन महीने या उससे अधिक समय से खाली चल रहे थे और जिन्हें स्कूल प्रबंधन द्वारा पुनर्जीवित नहीं कराया गया था।

तीन महीने की समयसीमा और निरस्त होते पद
उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा अधिनियम (Uttarakhand Teacher Recruitment Ban, 2006 के तहत भर्ती के कड़े प्रावधान मौजूद हैं। नियमों के अनुसार, यदि कोई पद रिक्त होता है, तो प्रबंधन समिति को तीन महीने के भीतर भर्ती की प्रक्रिया शुरू करनी होती है। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो वह पद अस्थायी रूप से (Post Abolition Rules) के दायरे में आकर स्वतः निरस्त मान लिया जाता है। शासन के संज्ञान में आया है कि कई स्कूल प्रबंधन इन मृतप्राय पदों पर भी नियुक्तियां कर रहे थे, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है।
मानकों की अनदेखी और अवैध नियुक्तियों की शिकायत
शासन को लगातार ऐसी खबरें मिल रही थीं कि अशासकीय स्कूलों में शिक्षक और कर्मचारियों की भर्तियों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई स्कूलों में अमान्य पदों पर न केवल (Illegal Appointment Practices) को अंजाम दिया जा रहा था, बल्कि बैक डोर से तबादलों का खेल भी चल रहा था। शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के प्रावधानों को दरकिनार कर की जा रही ये नियुक्तियां सीधे तौर पर सरकारी राजस्व और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ हैं।
पंद्रह दिनों के भीतर मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा सचिव ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्हें अगले पंद्रह दिनों के भीतर प्रदेश भर के सभी अशासकीय स्कूलों में रिक्त पदों, वर्तमान में चल रही भर्ती प्रक्रिया और अब तक की गई (Departmental Inquiry Report) का पूरा ब्योरा शासन को सौंपना होगा। इस जांच के बाद यह साफ हो जाएगा कि राज्य में कितने पदों पर नियम विरुद्ध तरीके से भर्ती की तैयारी की जा रही थी।
अमान्य पदों पर विज्ञापनों पर लगी पाबंदी
शिक्षा सचिव ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि जो पद नियमानुसार मान्य नहीं रह गए हैं, उन्हें किसी भी सूरत में विज्ञापित नहीं किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन अब अपनी मर्जी से पुराने रिक्त पदों पर (Recruitment Advertisement Ban) का उल्लंघन नहीं कर पाएंगे। जब तक शिक्षा निदेशक के स्तर से किसी पद का दोबारा सृजन (Re-creation of Posts) नहीं कर दिया जाता, तब तक उन पर किसी भी प्रकार की नियुक्ति या स्थानांतरण की कार्यवाही पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।
वेतन अनुदान रोकने की कड़ी चेतावनी
सरकार ने उन स्कूलों को भी कड़ा संदेश दिया है जो नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां करने की योजना बना रहे हैं। शिक्षा सचिव ने साफ कर दिया है कि यदि किसी अमान्य पद पर शिक्षक या कर्मचारी की नियुक्ति की जाती है, तो सरकार उसके (Salary Grant Discontinuation) के लिए कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करेगी। ऐसे कर्मियों के वेतन और भत्तों की पूरी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रबंधन की होगी और सरकारी खजाने से एक रुपया भी जारी नहीं किया जाएगा।
प्रबंधन समितियों की मनमानी पर लगाम
उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों में अक्सर प्रबंधन समितियों पर नियुक्तियों में पारदर्शिता न बरतने के आरोप लगते रहे हैं। सरकार के इस ताजा फैसले को (Management Committee Accountability) तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब प्रबंधकों को रिक्त पदों को भरने के लिए समय सीमा का ध्यान रखना होगा और हर कदम पर शिक्षा निदेशालय की अनुमति अनिवार्य होगी। इससे योग्य अभ्यर्थियों को पारदर्शी तरीके से रोजगार मिलने की उम्मीद जगी है।
शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता का नया दौर
धामी सरकार का यह निर्णय राज्य की शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के ‘मुख्य सेवक’ विजन का हिस्सा माना जा रहा है। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत (Educational System Reforms) को लागू किया जा रहा है। आने वाले समय में अशासकीय स्कूलों के पदों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है, ताकि स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी न हो और नियुक्तियों में किसी भी प्रकार की धांधली की गुंजाइश भी न रहे।



