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ArtificialIntelligence – ऊर्जा संकट को लेकर एलन मस्क की नई चेतावनी, अंतरिक्ष बन सकता है अगला ठिकाना

ArtificialIntelligence – अरबपति उद्योगपति एलन मस्क एक बार फिर भविष्य को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी ऊर्जा खपत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। मस्क का मानना है कि जिस तेजी से एआई का विस्तार हो रहा है, आने वाले कुछ ही वर्षों में पृथ्वी की मौजूदा ऊर्जा व्यवस्था इसे संभालने में सक्षम नहीं रह जाएगी।

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एआई की बढ़ती ऊर्जा मांग पर मस्क की चेतावनी

एक हालिया पॉडकॉस्ट बातचीत के दौरान एलन मस्क ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास में सबसे बड़ी बाधा अब तकनीक नहीं, बल्कि बिजली की उपलब्धता बनती जा रही है। उनके अनुसार, उन्नत एआई सिस्टम जिस स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता मांगते हैं, वह अभूतपूर्व ऊर्जा खपत के बिना संभव नहीं है। मस्क का अनुमान है कि दो से तीन वर्षों के भीतर यह स्थिति इतनी गंभीर हो सकती है कि पृथ्वी पर बड़े पैमाने पर एआई कंप्यूटिंग को जारी रखना कठिन हो जाएगा।

पृथ्वी की सीमित ऊर्जा संरचना

मस्क ने अमेरिका के उदाहरण का जिक्र करते हुए बताया कि देश वर्तमान में औसतन लगभग आधा टेरावाट बिजली की खपत करता है। इस खपत को दोगुना करना न केवल तकनीकी रूप से जटिल है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। उनके मुताबिक, बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे, पर्यावरणीय अनुमति और नीतिगत फैसले समयसाध्य होते हैं, जो एआई की तेज रफ्तार से मेल नहीं खा पाते।

अंतरिक्ष में सौर ऊर्जा की संभावनाएं

एलन मस्क का तर्क है कि अंतरिक्ष, विशेष रूप से पृथ्वी की कक्षा, इस समस्या का व्यावहारिक समाधान पेश कर सकता है। वहां स्थापित सौर पैनल लगातार सूर्य की रोशनी प्राप्त करते हैं और वायुमंडल की बाधाओं से मुक्त रहते हैं। इसका सीधा मतलब है कि अंतरिक्ष में लगे सौर पैनल, धरती पर मौजूद पैनलों की तुलना में कहीं अधिक और स्थिर ऊर्जा उत्पादन कर सकते हैं। यही कारण है कि मस्क अंतरिक्ष को भविष्य की कंप्यूटिंग का केंद्र मानते हैं।

कम होती लॉन्च लागत और आर्बिटल इंफ्रास्ट्रक्चर

मस्क ने यह भी कहा कि जैसे-जैसे सैटेलाइट लॉन्च और मानव अंतरिक्ष यात्रा की लागत कम होगी, वैसे-वैसे कक्षा में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना अधिक व्यावहारिक होता जाएगा। उनकी कंपनी स्पेसएक्स इस दिशा में पहले से ही सक्रिय है। रियूजेबल रॉकेट तकनीक ने लॉन्च खर्च को काफी हद तक कम किया है, जिससे अंतरिक्ष आधारित परियोजनाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक सुलभ बन रही हैं।

स्पेसएक्स की भूमिका और तकनीकी प्रगति

स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल और उसके सफल मिशन इस बात का उदाहरण हैं कि निजी कंपनियां अंतरिक्ष तकनीक में कितनी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सुनीता विलियम्स सहित कई अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी ने कंपनी की विश्वसनीयता को मजबूत किया है। मस्क का मानना है कि इसी तरह की प्रगति भविष्य में अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर एआई सिस्टम स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

पृथ्वी से बाहर सोचने की जरूरत

मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने का सपना देखने वाले मस्क का कहना है कि यदि मानवता केवल पृथ्वी तक सीमित रह जाती है, तो तकनीकी विकास एक बिंदु पर आकर ठहर सकता है। उनके अनुसार, एआई के अगले चरण के प्रयोग और विस्तार के लिए हमें पृथ्वी से बाहर निकलकर सोचने की जरूरत होगी। मस्क का दावा है कि कुछ ही वर्षों में अंतरिक्ष में स्थापित एआई कंप्यूटिंग क्षमता, पृथ्वी पर मौजूद कई प्रणालियों से अधिक हो सकती है।

वैश्विक बहस के बीच आया बयान

एलन मस्क का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में एआई डेटा सेंटर्स की ऊर्जा खपत को लेकर बहस तेज हो चुकी है। हाल ही में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने भी सवाल उठाया था कि भारत और चीन जैसे देशों में एआई उपयोग के लिए आवश्यक ऊर्जा का बोझ अमेरिका क्यों उठाए। यह टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि एआई का ऊर्जा प्रभाव अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक नीति और अर्थव्यवस्था से भी जुड़ चुका है।

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