Billionaire Xu Bo Surrogate Children: तेजी से वायरल हो रहा है अरबपति का पागलपन, जानें शू बो की सनक का सच
Billionaire Xu Bo Surrogate Children: चीन की मशहूर मोबाइल गेमिंग कंपनी ‘दुओयी नेटवर्क’ के संस्थापक और चेयरमैन शू बो इन दिनों अपनी व्यावसायिक उपलब्धियों से ज्यादा अपनी निजी जिंदगी के फैसलों को लेकर वैश्विक चर्चा का विषय बने हुए हैं। 48 वर्षीय इस अरबपति ने कथित तौर पर सरोगेसी के माध्यम से 100 से अधिक बच्चों को जन्म दिया है, लेकिन उनकी भूख अभी शांत नहीं हुई है। शू बो की योजना अमेरिका में जन्मे कम से कम 20 ऐसे वारिस तैयार करने की है, जो भविष्य में उनके 1.1 अरब डॉलर यानी लगभग 9,000 करोड़ रुपये के विशाल वीडियो गेम साम्राज्य की बागडोर संभालेंगे।

वॉल स्ट्रीट जर्नल का खुलासा और ‘चीन का पहला पिता’ होने का दावा
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक चौंकाने वाली जांच में अमेरिकी अदालती दस्तावेजों और सोशल मीडिया पोस्ट के हवाले से शू बो के इस ‘बेबी प्रोजेक्ट’ का पर्दाफाश हुआ है। खुद को ‘चीन का पहला पिता’ कहने वाले शू बो (surrogacy laws in USA) का फायदा उठाकर चीन के सख्त जन्म प्रतिबंधों और कानूनों को धता बता रहे हैं। अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को मिलने वाली स्वतः नागरिकता को वे एक रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहे हैं, जिससे उनके बच्चों के लिए वैश्विक व्यापार और अवसरों के द्वार हमेशा के लिए खुल जाएंगे।
सरोगेसी का गुप्त जाल और बच्चों की संख्या पर रहस्य
चूंकि चीन में सरोगेसी पूरी तरह गैरकानूनी है, इसलिए शू बो ने अमेरिकी एजेंसियों और एग डोनर्स का सहारा लिया। बच्चों की असल संख्या को लेकर (Duoyi Network official statements) और उनकी पूर्व प्रेमिका तांग जिंग के दावों में बड़ा विरोधाभास है। जहां कंपनी ने पहले वीबो पर 100 से अधिक बच्चों की बात कबूली थी और बाद में उसे बदलकर केवल 12 बताया, वहीं तांग जिंग का दावा है कि शू बो के कुल बच्चों की संख्या 300 के पार हो सकती है। यह संख्या किसी भी सामान्य सोच से परे है और एक व्यक्ति के पितृत्व की सीमाओं पर सवाल उठाती है।
कोर्ट में पैतृक अधिकारों की जंग और ‘उत्तम बेटों’ की चाहत
साल 2023 में लॉस एंजिल्स की एक फैमिली कोर्ट में जब शू बो ने चार अजन्मे बच्चों के अधिकारों के लिए अर्जी दी, तो जज भी उनकी दलीलें सुनकर हैरान रह गए। शू बो ने वीडियो कॉल के जरिए अदालत को बताया कि वे (ambition for heirs) के चलते कम से कम 20 अमेरिकी बच्चे चाहते हैं। उन्होंने खुले तौर पर लड़कों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें ‘उत्तम’ बताया। जज ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया, लेकिन शू बो का इरादा स्पष्ट है कि वे अपने व्यापारिक राजवंश को केवल अपने ही खून के वारिसों के जरिए सुरक्षित रखना चाहते हैं।
एलन मस्क और पावेल दुरोव से मिलती प्रेरणा
शू बो का यह व्यवहार दुनिया के अन्य शक्तिशाली और अमीर पुरुषों के नक्शेकदम पर चलता दिखाई देता है। वे टेस्ला के सीईओ (Elon Musk family size) और टेलीग्राम के संस्थापक पावेल दुरोव की जनसंख्या वृद्धि की विचारधारा से काफी प्रभावित नजर आते हैं। मस्क के 14 बच्चे और दुरोव के स्पर्म डोनेशन से हुए 100 से अधिक बच्चों की कहानियों ने शू बो को यह यकीन दिला दिया है कि अधिक वारिस होना ही बिजनेस की निरंतरता की सबसे बड़ी गारंटी है। वे तो अपने बच्चों की शादी मस्क के बच्चों से कराकर एक ‘वैश्विक पारिवारिक राजवंश’ बनाने का सपना भी देख चुके हैं।
नैतिकता, कानून और नैनियों के भरोसे पलते बच्चे
शू बो की इस कहानी ने कई गंभीर नैतिक और सामाजिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनके कई बच्चे कैलिफोर्निया में नैनियों और नौकरों द्वारा पाले जा रहे हैं। खुद शू बो ने कोर्ट में स्वीकार किया कि अपनी अत्यधिक व्यस्तता के कारण वे (parental absence issues) का शिकार हैं और अपने बच्चों से अभी तक मिल भी नहीं पाए हैं। लड़कों को प्राथमिकता देना और बच्चों को केवल ‘बिजनेस टूल’ की तरह देखना उनके पितृत्व के प्रति नजरिए को संदेहास्पद बनाता है।
वैश्विक नागरिकता और चीन के अमीरों का नया ट्रेंड
शू बो अकेले ऐसे चीनी अरबपति नहीं हैं जो विदेशी सरोगेसी का रुख कर रहे हैं, बल्कि यह चीन के अमीर तबके में एक गुप्त ट्रेंड बन चुका है। अमेरिका में (birthright citizenship debate) के बीच इस तरह के मामले डोल्ड ट्रंप जैसे नेताओं के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकते हैं। चीन में बैन होने के बावजूद बढ़ती सरोगेसी प्रथा दिखाती है कि कैसे पैसे के जोर पर कानून की सीमाओं को लांघा जा रहा है। शू बो की यह सनक भविष्य में उनके साम्राज्य को बचा पाएगी या विवादों में डुबो देगी, यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।
निष्कर्ष: तकनीक, पैसा और एक कृत्रिम राजवंश की कल्पना
शू बो की यह दास्तां हमें उस भविष्य की ओर ले जाती है जहां पैसा प्राकृतिक नियमों को चुनौती देने लगता है। एक (billionaire lifestyle extremes) की यह पराकाष्ठा है कि जहां बच्चों को इंसान नहीं बल्कि उत्तराधिकार की मशीन समझा जा रहा है। 9000 करोड़ का साम्राज्य भले ही बड़ा हो, लेकिन क्या बिना पिता के साये और मानवीय संवेदनाओं के पलने वाले ये वारिस उस विरासत को संभाल पाएंगे? शू बो का यह प्रयोग सफल होगा या एक सामाजिक त्रासदी में बदल जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।


