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Politics Election BJP: भाजपा के नए संगठन में जगह पाने की चुनौती, विधानसभा चुनावों में तय होगा नेताओं का भविष्य

Politics Election BJP: भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कमान संभालते ही संगठन में व्यापक फेरबदल के संकेत दे दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि पार्टी की आगामी राष्ट्रीय टीम का स्वरूप काफी हद तक पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के नतीजों और वहां तैनात किए गए नेताओं के रिपोर्ट कार्ड पर निर्भर करेगा। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के चुनावी मैदान में पसीना बहा रहे दिग्गजों के लिए यह केवल पार्टी को जीत दिलाने का लक्ष्य नहीं है, बल्कि नई टीम में अपनी जगह पक्की करने की एक अग्निपरीक्षा भी है।

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Politics Election Bjp: भाजपा के नए संगठन में जगह पाने

असम फतह के लिए अनुभवी रणनीतिकारों की फौज तैयार

पूर्वोत्तर के द्वार कहे जाने वाले असम में भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। राज्य के चुनाव प्रभारी बैजयंत ‘जय’ पांडा के नेतृत्व में करीब एक दर्जन कद्दावर नेताओं की एक विशेष टीम गठित की गई है। इस टोली में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, पूर्व सांसद प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे उभरते हुए और अनुभवी चेहरों को शामिल किया गया है। इनके साथ ही संगठन के काम में माहिर माने जाने वाले राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है। यह टीम न केवल चुनावी गतिविधियों का संचालन करेगी, बल्कि दिल्ली मुख्यालय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और स्थानीय इकाई के बीच एक मजबूत कड़ी के रूप में कार्य करेगी।

केवल प्रचार नहीं, बूथ स्तर के प्रबंधन पर रहेगा जोर

पार्टी ने इस बार नेताओं की भूमिका केवल जनसभाओं और भाषणों तक सीमित नहीं रखी है। सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं को आवंटित लोकसभा क्षेत्रों में गहराई से उतरकर चुनावी समीकरण साधने के निर्देश दिए गए हैं। इनका मुख्य कार्य क्षेत्रीय जनसांख्यिकी का सूक्ष्म विश्लेषण करना और बूथ स्तर पर पार्टी की पकड़ मजबूत करना है। चुनाव के करीब आने पर उम्मीदवारों के चयन और टिकट वितरण की प्रक्रिया में भी इन बाहरी पर्यवेक्षकों की राय को काफी महत्व दिया जाएगा। सीधे शब्दों में कहें तो, जमीनी स्तर पर मतदाताओं के बीच भाजपा की साख को और अधिक वजनदार बनाना ही इनका प्राथमिक कार्य है।

चयन प्रक्रिया में वैचारिक निष्ठा और ट्रैक रिकॉर्ड को प्राथमिकता

रणनीतिकारों की इस टीम को चुनते समय पार्टी ने उनके पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और वैचारिक पृष्ठभूमि को विशेष ध्यान में रखा है। टीम में शामिल अधिकांश नेता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और युवा मोर्चा जैसे संगठनों से निकले हैं और उनकी जड़ें आरएसएस से जुड़ी हुई हैं। अध्यक्ष नितिन नवीन का मानना है कि ‘संगठनात्मक निरंतरता’ बनाए रखने के लिए ऐसे चेहरों की जरूरत है जो भाजपा की कार्यसंस्कृति को गहराई से समझते हों। जो नेता इन चुनावों में बेहतर प्रबंधन और परिणाम देने में सफल रहेंगे, उन्हें आगामी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा सकता है।

भाजपा में नई पीढ़ी के नेतृत्व का उदय और सांगठनिक बदलाव

मात्र 45 वर्ष की आयु में नितिन नवीन को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलना पार्टी के भीतर एक बड़े पीढ़ीगत परिवर्तन का प्रमाण है। माना जा रहा है कि उनकी नई टीम में ऊर्जावान युवाओं और पुराने अनुभवी दिग्गजों का एक संतुलित मिश्रण देखने को मिलेगा। चूंकि इस वर्ष कई वरिष्ठ नेता राज्यसभा से मुक्त हो रहे हैं और केंद्र सरकार के कार्यकाल का मध्यांतर भी करीब है, ऐसे में संगठन के साथ-साथ मंत्रिमंडल में भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। असम की तर्ज पर ही पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए भी जल्द ही इसी तरह की विशेष टीमें घोषित की जाएंगी।

नए अध्यक्ष के लिए असम और बंगाल की कठिन चुनौती

नितिन नवीन के नेतृत्व की सबसे पहली और बड़ी परीक्षा असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव होंगे। असम में जहां भाजपा सत्ता की हैट्रिक लगाकर इतिहास रचने की कोशिश में है, वहीं मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे मुद्दों को चुनाव के केंद्र में ला दिया है। भाजपा ने राज्य में अपने माइक्रो-मैनेजमेंट को और सख्त करते हुए बूथों की संख्या 28 हजार से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य तय किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भी प्रियंका गांधी को मोर्चा सौंपकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

बंगाल में ममता के किले को भेदने की नई रणनीति

पश्चिम बंगाल में चुनौती असम से कहीं अधिक जटिल है। ममता बनर्जी के लंबे शासनकाल और उनके मजबूत व्यक्तित्व का मुकाबला करने के लिए भाजपा इस बार किसी एक चेहरे के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और विकास के एजेंडे पर भरोसा कर रही है। राज्य को विभिन्न जोन में बांटकर वहां ‘क्षेत्रीय वॉर-रूम’ स्थापित किए गए हैं। नितिन नवीन ने खुद कमान संभालते हुए बंगाल के दौरे शुरू कर दिए हैं। पार्टी का पूरा फोकस भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को उठाकर जमीनी कार्यकर्ताओं में जोश भरना है। इन चुनावों के परिणाम ही तय करेंगे कि भाजपा का भविष्य और उसकी नई टीम का चेहरा कैसा होगा।

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