NEET Student Case: 6 नाबालिगों का होगा डीएनए टेस्ट, सवालों के घेरे में महिला दारोगा
NEET Student Case: पटना के बहुचर्चित नीट छात्रा हत्याकांड में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने अब इस मामले में 6 नाबालिगों को भी जांच की रडार पर लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा इन सभी के खून के नमूने डीएनए टेस्ट के लिए पहले ही भेजे जा चुके हैं, जिनकी फॉरेंसिक रिपोर्ट अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है। ये नाबालिग मुख्य रूप से हॉस्टल संचालक, भवन मालिक और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े बताए जा रहे हैं। तकनीकी साक्ष्यों और गहन पूछताछ के आधार पर पुलिस किसी बड़े सुराग की तलाश में है। इसी बीच, निलंबित महिला दारोगा रोशनी कुमारी से हुई पूछताछ ने मामले में पुलिसिया लापरवाही की परतों को और उघाड़ दिया है।

स्पर्म मिलान के लिए डीएनए जांच पर टिकी एसआईटी की नजर
एसआईटी ने हॉस्टल और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज के साथ-साथ मोबाइल कॉल डिटेल्स का बारीकी से विश्लेषण किया है। छात्रा के साथ हुई दरिंदगी के वैज्ञानिक प्रमाण जुटाने के लिए छात्रा के कपड़ों पर मिले स्पर्म के नमूनों का मिलान इन संदिग्ध नाबालिगों के डीएनए से कराया जाएगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संवेदनशील मामला है और वे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही किसी नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं। इसके अलावा, कुछ अन्य संदिग्धों के भी सैंपल जल्द ही लिए जाने की संभावना है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
छात्रा के फुफेरे भाई से पूछताछ और तकनीकी इनपुट
जांच के क्रम में छात्रा के फुफेरे भाई का नाम भी सामने आया है, जिसे पूछताछ के लिए जहानाबाद से पटना तलब किया गया। बताया जा रहा है कि मृतका के मोबाइल रिकॉर्ड में इस छात्र का नंबर मिला है और 5 जनवरी से पहले दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई थी। छात्र अपनी प्रायोगिक परीक्षा छोड़कर एसपी सिटी के दफ्तर पहुंचा, लेकिन अधिकारियों ने उसे शनिवार को दोबारा उपस्थित होने का निर्देश दिया है। एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या छात्रा ने अपनी परेशानी के बारे में किसी परिजन या करीबी से कोई बात साझा की थी।
निलंबित थानेदार रोशनी कुमारी के पास नहीं थे जरूरी जवाब
मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित की गईं तत्कालीन थानेदार रोशनी कुमारी से एसएसपी कार्यालय में करीब एक घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। एसआईटी यह जानना चाहती थी कि छात्रा की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने से लेकर उसे अस्पताल में भर्ती कराने तक, पुलिस की ओर से क्या त्वरित कार्रवाई की गई। सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान रोशनी कुमारी कई महत्वपूर्ण सवालों पर निरुत्तर रहीं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर गंभीरता दिखाई जाती, तो शायद आज स्थिति कुछ और होती।
परिजनों का एसआईटी पर अविश्वास और सीबीआई जांच की मांग
मृतक छात्रा के माता-पिता पुलिस की वर्तमान जांच प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं। उनका आरोप है कि एसआईटी मामले को सुलझाने के बजाय इसे भटकाने की कोशिश कर रही है और बेवजह जांच का रुख जहानाबाद की ओर मोड़ा जा रहा है। हाल ही में डीजीपी आवास के बाहर काफी देर तक हाई-वोल्टेज ड्रामा भी देखने को मिला। परिजनों का कहना है कि उन्हें अब बिहार पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है और वे मामले की सीबीआई जांच चाहते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से पहले ही सीबीआई जांच की सिफारिश भेजने की खबरें आ चुकी हैं, लेकिन पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें केवल कागजी आश्वासन नहीं बल्कि न्याय चाहिए।



