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Ramayana – नितेश तिवारी की फिल्म में रणबीर के राम पर अरुण गोविल का भरोसा

Ramayana – नितेश तिवारी के निर्देशन में तैयार हो रही फिल्म “रामायण” इस साल की सबसे चर्चित सिनेमाई परियोजनाओं में शुमार हो चुकी है। पौराणिक कथाओं पर आधारित इस भव्य प्रस्तुति को लेकर शुरुआती दिनों से ही दर्शकों में उत्सुकता और चर्चा बनी हुई है। फिल्म में भगवान राम की भूमिका रणबीर कपूर निभा रहे हैं, जिसे लेकर शुरुआत में सोशल मीडिया पर तीखी बहस भी देखने को मिली थी। कई लोग इस चयन को लेकर संशय में थे, जबकि कुछ ने इसे नया प्रयोग बताया। बावजूद इसके, जैसे-जैसे फिल्म से जुड़ी जानकारी और दृश्य सामने आते गए, माहौल धीरे-धीरे बदलता नजर आया।

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टीजर के बाद बदला माहौल

फिल्म का पहला टीजर जारी होने के बाद समीकरण कुछ हद तक बदल गए। भले ही उसमें रणबीर कपूर की झलक महज कुछ सेकंड की थी, लेकिन उस संक्षिप्त दृश्य ने दर्शकों के एक बड़े वर्ग का नजरिया बदल दिया। सिनेमाई भव्यता, सेट डिजाइन और किरदारों की प्रस्तुति ने लोगों का ध्यान खींचा। कई आलोचकों और दर्शकों ने माना कि रणबीर का लुक और बॉडी लैंग्वेज राम के चरित्र के अनुरूप लग रही थी। इसी बीच फिल्म उद्योग के भीतर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं, जिसने इस बहस को एक नया आयाम दिया।

अरुण गोविल की प्रतिक्रिया

रामानंद सागर की ऐतिहासिक टीवी श्रृंखला “रामायण” में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल ने हाल ही में इस फिल्म पर अपनी राय साझा की। पीटीआई से बातचीत के दौरान उन्होंने नितेश तिवारी के निर्देशन की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना बेहद सोच-समझकर और गंभीरता के साथ बनाई जा रही है। अरुण गोविल खुद इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं, जिससे उनकी जुड़ाव और भी गहरा हो जाता है। उन्होंने रणबीर कपूर की तारीफ करते हुए कहा कि वह इस भूमिका में स्वाभाविक और प्रभावी नजर आ रहे हैं। उनके अनुसार, पर्दे पर राम का किरदार निभाना केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी भी है।

किरदार और आचरण पर जोर

अरुण गोविल ने अपने बयान में यह भी रेखांकित किया कि भगवान का पात्र निभाने वाले कलाकार का व्यक्तित्व और आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना उसका रूप-रंग। उन्होंने कहा कि इस तरह की भूमिका के लिए कलाकार का भीतर से पवित्र और संवेदनशील होना जरूरी है। उनके शब्दों में, जब दर्शक किसी अभिनेता को ऐसे दिव्य चरित्र में देखते हैं, तो उन्हें केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक आभास भी महसूस होना चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रणबीर कपूर व्यक्तिगत स्तर पर विनम्र और सुलझे हुए इंसान हैं, जो इस किरदार के साथ न्याय करने में मदद करेगा।

तुलना को लेकर संतुलित दृष्टिकोण

फिल्मों के बीच तुलना पर बोलते हुए अरुण गोविल ने कहा कि जब कोई मानक स्थापित हो जाता है, तो तुलना स्वाभाविक रूप से होती है। उनके अनुसार, इससे किसी को असहज नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे स्वस्थ चर्चा के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान के किरदार में कलाकार का चेहरा, हाव-भाव और शारीरिक भाषा बहुत मायने रखती है। अगर दर्शक किसी अभिनेता को देखकर यह महसूस कर सकें कि “भगवान ऐसे भी दिख सकते हैं”, तो वह प्रस्तुति सफल मानी जाएगी।

आदिपुरुष से अंतर स्पष्ट

प्रभास की फिल्म “आदिपुरुष” से तुलना के सवाल पर अरुण गोविल ने साफ तौर पर कहा कि दोनों फिल्मों की शैली और दृष्टिकोण बिल्कुल अलग हैं। उनके मुताबिक “रामायण” जहां पारंपरिक और भावनात्मक संवेदनाओं पर आधारित है, वहीं “आदिपुरुष” को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि हर फिल्मकार अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता के साथ काम करता है, इसलिए सीधे तौर पर तुलना करना उचित नहीं होगा। कुल मिलाकर, उनका मानना है कि नितेश तिवारी की “रामायण” अपनी अलग पहचान बनाएगी और दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ेगी।

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