Madhapura – इंजीनियरिंग हॉस्टल में छात्रा की मौत के बाद सुरक्षा और भरोसे पर सवाल
Madhapura – सोमवार की शाम मधेपुरा जिले के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रावास में एक छात्रा की अचानक मौत ने पूरे परिसर को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद से हॉस्टल में रहने वाली छात्राएं गहरे सदमे और भय में हैं। मंगलवार सुबह कई छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से अपने-अपने घर जाने की अनुमति मांगी, यह कहते हुए कि वे खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्राचार्य को स्वयं छात्रावास जाकर उन्हें समझाना पड़ा, जिसके बाद फिलहाल छात्राएं वहीं रुकने को राजी हुईं। इस बीच मृतका के परिवार ने कॉलेज प्रशासन और पुलिस पर समय पर सूचना न देने का आरोप लगाते हुए व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

छात्रावास में फैला डर और बेचैनी
घटना के बाद से हॉस्टल का माहौल पूरी तरह बदल गया है। जिन कमरों में पहले सामान्य बातचीत और पढ़ाई का शोर रहता था, वहां अब खामोशी और चिंता छाई हुई है। कई छात्राएं इतनी घबराई हुई थीं कि उन्होंने खाना तक नहीं खाया। कुछ का कहना था कि जब तक घटना की स्पष्ट वजह सामने नहीं आती, तब तक वे यहां रहने में असहज महसूस कर रही हैं। प्राचार्य अमरेंद्र कुमार अमर ने छात्रावास पहुंचकर सभी छात्राओं से बात की, उनकी आशंकाएं सुनीं और भरोसा दिलाया कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
मृतका के पिता की नाराजगी और सवाल
मृत छात्रा के पिता ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की मौत की जानकारी कॉलेज प्रशासन से नहीं मिली, बल्कि उसकी रूममेट ने फोन करके बताया। उनके मुताबिक, रविवार को ही उनकी बेटी से आखिरी बार बात हुई थी और तब वह बिल्कुल सामान्य लग रही थी। 27 जनवरी को ही वह अपने घर से कॉलेज लौटी थी और सितंबर 2024 में उसने इस इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था। पिता का कहना है कि अगर प्रशासन ने उन्हें तुरंत सूचित किया होता तो वे पहले ही पहुंच जाते। उन्होंने कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था और सूचना तंत्र पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रशासनिक कदम और सुरक्षा बढ़ोतरी
बढ़ते तनाव और छात्राओं की चिंताओं को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने तत्काल कदम उठाए हैं। प्राचार्य ने बताया कि छात्रावास में तैनात कर्मचारियों की संख्या दोगुनी कर दी गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि छात्राओं को डरने की जरूरत नहीं है और उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मृतका की रूममेट, जो घटना के बाद से मानसिक रूप से परेशान थी, को फिलहाल उसके घर भेज दिया गया है ताकि वह सामान्य हो सके और परिवार के बीच रहकर खुद को संभाल सके।
पुलिस जांच और मेडिकल प्रक्रिया
घटना के बाद पुलिस ने रातभर मेडिकल कॉलेज परिसर में डेरा डाले रखा और आवश्यक जांच प्रक्रिया शुरू की। छात्रा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है, जिसमें छात्रावास की व्यवस्था, मेडिकल इतिहास और घटनाक्रम शामिल हैं।
कॉलेज में भरोसा बहाल करने की चुनौती
इस घटना ने न सिर्फ छात्रावास बल्कि पूरे कॉलेज समुदाय को हिलाकर रख दिया है। जहां एक ओर छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षा बढ़ाने से ही नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और स्पष्ट संवाद से ही स्थिति सामान्य हो सकेगी। फिलहाल, कॉलेज प्रशासन और पुलिस दोनों ही अपने-अपने स्तर पर मामले को संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन छात्राओं और उनके अभिभावकों के मन में पैदा हुआ डर आसानी से दूर होता नहीं दिख रहा।



