उत्तराखण्ड

UPNAL – सरकार का बड़ा फैसला, दस साल पूरे कर चुके कर्मियों को समान वेतन

UPNAL – उत्तराखंड सरकार ने उपनल (उत्तराखंड परिवहन निगम लिमिटेड) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक अहम नीतिगत निर्णय लेते हुए समान कार्य के बदले समान वेतन लागू करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया है। मंगलवार को सैनिक कल्याण विभाग की ओर से यह अधिसूचना जारी की गई, जिस पर सचिव दीपेंद्र चौधरी के हस्ताक्षर हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन उपनल कर्मियों ने निरंतर दस वर्ष की सेवा पूरी कर ली है और जो विभागों में स्वीकृत पदों के सापेक्ष कार्यरत हैं, वे अब उस पद के अनुरूप वेतनमान पाने के पात्र होंगे। इसके साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि संबंधित कर्मचारी के पास उस पद के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता होनी चाहिए।

upnal equal pay 10 years employees

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चरणबद्ध तरीके से लागू होगी नई व्यवस्था


सरकार ने साफ किया है कि यह लाभ एक साथ सभी कर्मचारियों को नहीं दिया जाएगा, बल्कि इसे चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाएगा। पहले चरण में केवल उन्हीं कर्मियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने 25 नवंबर 2025 तक लगातार दस वर्ष की सेवा पूरी कर ली थी। प्रशासनिक दृष्टि से व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए 12 नवंबर 2018 को कट-ऑफ डेट तय किया गया है, जिसके आधार पर पात्रता का निर्धारण किया जाएगा।

पात्रता निर्धारण के लिए तय किए गए मानक


आदेश के अनुसार, लाभ केवल उन कर्मचारियों को मिलेगा जो विभागों में पहले से स्वीकृत पदों पर काम कर रहे हैं। अस्थायी या अतिरिक्त पदों पर कार्यरत कर्मियों को इस दायरे में स्वतः शामिल नहीं किया गया है। सरकार ने यह प्रावधान इसलिए रखा है ताकि वेतन विसंगतियों को दूर करते हुए वित्तीय अनुशासन भी बना रहे।

योग्यता न रखने वालों को भी आंशिक राहत


विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जिन कर्मचारियों की नियुक्ति स्वीकृत पद के सापेक्ष नहीं हुई है या जिनके पास आवश्यक शैक्षिक अर्हता नहीं है, उन्हें पूरी तरह वंचित नहीं किया गया है। ऐसे कर्मियों को न्यूनतम श्रेणी के स्वीकृत मानदेय के अनुसार भुगतान किया जाएगा, ताकि उनके हित भी सुरक्षित रहें और व्यवस्था में संतुलन बना रहे।

वेतनमान और महंगाई भत्ते का स्वरूप


नए आदेश के तहत पात्र उपनल कर्मियों को उनके पद के अनुरूप न्यूनतम वेतनमान के साथ महंगाई भत्ता भी दिया जाएगा। इससे न केवल उनके मासिक पारिश्रमिक में वृद्धि होगी, बल्कि लंबे समय से चली आ रही आर्थिक अनिश्चितता भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और कार्यकुशलता में भी सुधार आएगा।

कर्मचारियों की लंबी लड़ाई के बाद मिला निर्णय


उपनल कर्मी पिछले कई वर्षों से समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग उठा रहे थे। अलग-अलग मंचों पर प्रदर्शन, ज्ञापन और वार्ताओं के बाद सरकार ने 15 जनवरी को उनकी मांग पर सैद्धांतिक सहमति जताई थी। इसके बाद विभिन्न विभागों से राय-मशविरा कर अंतिम आदेश तैयार किया गया, जिसे अब लागू कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और आगे की दिशा


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने उपनल कर्मियों को उनका वाजिब हक दे दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शुरू से ही कार्मिक हितों के प्रति संवेदनशील रही है और आगे भी रहेगी। उनके अनुसार, प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद सरकार प्रदेश और कर्मचारियों दोनों के हित में संतुलित समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।

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