Hajipur – सदर अस्पताल के लेबर वार्ड में नवजात को लेकर गंभीर विवाद
Hajipur – बिहार के हाजीपुर स्थित सदर अस्पताल में बुधवार को एक प्रसव के बाद पैदा हुए नवजात को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हो गया, जिसने पूरे अस्पताल परिसर को हिलाकर रख दिया। लेबर वार्ड में ऑपरेशन के जरिए हुई डिलीवरी के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर बच्चा बदलने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पहले उन्हें बेटे के जन्म की जानकारी दी गई, लेकिन बाद में जो नवजात उन्हें सौंपा गया, वह बेटी निकली। इस घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया, जिसके चलते कुछ देर के लिए स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित रहीं और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।

सुबह से शुरू हुआ घटनाक्रम
गोरौल थाना क्षेत्र के इस्लामपुर निवासी धीरज कुमार की 25 वर्षीय पत्नी गुंजन देवी को बुधवार सुबह प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, लगभग ढाई घंटे की औपचारिक प्रक्रिया के बाद उन्हें ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। करीब तीस मिनट बाद अस्पताल कर्मियों ने बाहर आकर बताया कि ऑपरेशन सफल रहा और महिला ने बेटे को जन्म दिया है। इसी दौरान स्वास्थ्य कर्मियों ने यह भी कहा कि चूंकि पहले से एक बेटी है, इसलिए परिवार चाहे तो महिला की नसबंदी करवाई जा सकती है। परिजनों ने इस पर सहमति दे दी और आवश्यक कागजात पर हस्ताक्षर कर दिए।
नवजात दिखाए बिना नसबंदी पर सवाल
परिजनों का आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें नवजात को देखने नहीं दिया गया। ऑपरेशन और नसबंदी के करीब एक घंटे बाद अस्पताल कर्मियों ने उन्हें एक नवजात सौंपा। जब परिजनों ने बच्ची को देखा तो वे हैरान रह गए, क्योंकि उन्हें पहले बेटे के जन्म की बात कही गई थी। इस विरोधाभास पर उन्होंने तुरंत अस्पताल कर्मियों से पूछताछ की, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसी बात को लेकर अस्पताल के लेबर वार्ड के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
अस्पताल में हंगामा, पुलिस का हस्तक्षेप
गुस्साए परिजनों ने नवजात बदलकर बेचने का गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ती देख कुछ डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी मौके से हट गए। सूचना मिलते ही नगर थाना की पुलिस सदर अस्पताल पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद मामला शांत हुआ, लेकिन परिजन अपनी शिकायत पर अड़े रहे और जांच की मांग करते रहे।
पीड़ित परिवार का बयान
गुंजन देवी के भाई संजय कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने सुबह करीब 11:30 बजे अपनी बहन को अस्पताल में भर्ती कराया था। कुछ समय बाद उसे ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया और थोड़ी देर बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने बेटे के जन्म की सूचना दी। उन्होंने कहा कि परिवार ने अस्पताल कर्मियों की बातों पर भरोसा करते हुए नसबंदी के लिए सहमति दी, लेकिन नवजात को दिखाए बिना यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जो अब सवालों के घेरे में है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और जांच की पहल
सदर अस्पताल की उपाधीक्षक डॉ. गुड़िया कुमारी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि आरोपों की जांच के लिए गुरुवार को ड्यूटी पर तैनात सभी संबंधित चिकित्सा कर्मियों की आपात बैठक बुलाई गई है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन थिएटर से लेकर लेबर वार्ड तक की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी और उपलब्ध रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा स्टाफ के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सिस्टम पर उठते सवाल
यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में प्रसव संबंधी व्यवस्थाओं और पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। परिजनों का कहना है कि यदि उन्हें समय पर नवजात दिखाया गया होता तो यह विवाद ही नहीं खड़ा होता। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बिना जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा
फिलहाल पुलिस ने भी मामले की जानकारी ली है और जरूरत पड़ने पर औपचारिक शिकायत दर्ज करने की बात कही है। अस्पताल प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी निष्पक्षता से होगी और अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी। तब तक यह मामला सदर अस्पताल के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।



