उत्तराखण्ड

Power Tariff – फरवरी से उत्तराखंड में बिजली महंगी, एफपीपीसीए दरें बढ़ीं

Power Tariff – उत्तराखंड के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए फरवरी का महीना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित होने जा रहा है। राज्य की बिजली वितरण कंपनी उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) के तहत नई मासिक दरें अधिसूचित कर दी हैं, जिनमें प्रति यूनिट चार पैसे से लेकर 15 पैसे तक की बढ़ोतरी की गई है। यह बदलाव फरवरी की खपत पर लागू होगा, जिससे होली के आसपास आने वाले बिजली बिल पहले की तुलना में अधिक दिखेंगे। निगम के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार की मंजूरी के बाद बुधवार को यह आदेश जारी किया गया, जिसने घरेलू से लेकर औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सभी वर्गों को प्रभावित किया है।

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फरवरी से प्रभावी नई दरें

ऊर्जा निगम के अनुसार, एफपीपीसीए एक मासिक लागत समायोजन व्यवस्था है, जिसके जरिए ईंधन खरीद और बिजली उत्पादन पर आने वाले खर्च को उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित किया जाता है। फरवरी के लिए तय की गई दरें इस बात का संकेत देती हैं कि बिजली उत्पादन और खरीद लागत में दबाव बना हुआ है। हालांकि निगम ने यह स्पष्ट किया है कि यह कोई स्थायी टैरिफ संशोधन नहीं है, बल्कि अस्थायी मासिक समायोजन है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं के लिए लगातार बढ़ती दरें चिंता का विषय बनी हुई हैं, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए, जिनका मासिक बजट पहले से ही सीमित रहता है।

पिछले एक साल में दरों का उतार-चढ़ाव

यदि पिछले एक वर्ष के रुझानों पर नजर डालें तो बिजली दरों में स्थिरता कम और बढ़ोतरी ज्यादा देखने को मिली है। जनवरी 2025 से जनवरी 2026 के बीच केवल तीन महीनों—जुलाई, नवंबर और दिसंबर 2025—में एफपीपीसीए दरों में कमी दर्ज की गई, जबकि शेष 10 महीनों में बढ़ोतरी हुई। दिसंबर में प्रति यूनिट एक से पांच पैसे, नवंबर में तीन से 14 पैसे और जुलाई में 24 से 100 पैसे तक की राहत मिली थी। इसके विपरीत जनवरी 2025 में चार से 12 पैसे, फरवरी में नौ से 28 पैसे, जून में 17 से 71 पैसे, अगस्त में पांच से 21 पैसे, सितंबर में आठ से 33 पैसे और अक्तूबर में छह से 26 पैसे तक की वृद्धि की गई। यह पैटर्न दर्शाता है कि उपभोक्ताओं को लगातार बढ़ते खर्च का सामना करना पड़ा है।

मासिक समायोजन पर उठते सवाल

जब एफपीपीसीए को हर महीने लागू करने की व्यवस्था शुरू की गई थी, तब ऊर्जा निगम ने भरोसा दिलाया था कि इससे एक अप्रैल से लागू होने वाली वार्षिक बिजली दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, इसके बावजूद एक अप्रैल 2025 से टैरिफ में 5.6 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू कर दी गई। इस दोहरे बदलाव—मासिक समायोजन और वार्षिक वृद्धि—ने उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। उपभोक्ता मंच और सामाजिक संगठन लंबे समय से पारदर्शिता और बेहतर लागत प्रबंधन की मांग कर रहे हैं, ताकि बिजली दरें अधिक संतुलित रह सकें।

विभिन्न श्रेणियों पर कितना असर

नई एफपीपीसीए दरों के तहत अलग-अलग श्रेणियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 10 पैसे की बढ़ोतरी की गई है, जो सीधे आम परिवारों के मासिक खर्च को प्रभावित करेगी। बीपीएल श्रेणी में 0.4 पैसे, निजी ट्यूबवेल पर भी 0.4 पैसे और कृषि श्रेणी में 0.7 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है, जिससे ग्रामीण उपभोक्ताओं पर सीमित लेकिन प्रत्यक्ष असर पड़ेगा। व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए 14 पैसे, सरकारी संस्थानों के लिए 13 पैसे और उद्योगों के लिए भी 13 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी तय की गई है। इसके अलावा मिक्स लोड, रेलवे और ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए 12 पैसे की वृद्धि लागू होगी, जबकि अस्थायी कनेक्शनों पर सबसे अधिक 15 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि उत्पादन लागत के साथ-साथ बिजली खरीद समझौतों में आए बदलावों का परिणाम हो सकती है।

कुल मिलाकर, फरवरी की नई दरें उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का एक और संकेत लेकर आई हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि लागत में उतार-चढ़ाव किस दिशा में जाता है और ऊर्जा निगम उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए क्या कदम उठाता है।

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