Uttarakhand Political Leader Attack News: किच्छा के लाल पर डंडों से वार, उत्तराखंड की सियासत में उबाल
Uttarakhand Political Leader Attack News: उत्तराखंड के रुद्रपुर में रविवार की शाम उस वक्त सनसनी फैल गई जब किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ के छोटे बेटे और स्थानीय पार्षद सौरभ बेहड़ पर नकाबपोश बदमाशों ने जानलेवा हमला कर दिया। विधायक का परिवार रुद्रपुर के आवास विकास क्षेत्र में रहता है और यह घटना घर से महज 100 मीटर की दूरी पर अंजाम दी गई। इस (Violent Public Assault) ने शहर की कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हमलावरों ने जिस दुस्साहस के साथ विधायक पुत्र को निशाना बनाया, उससे स्थानीय लोगों में भारी दहशत व्याप्त है।

साजिश के तहत थाने बुलाया और रास्ते में घेरा
पार्षद सौरभ बेहड़ को रविवार शाम करीब सात बजे ट्रांजिट कैंप थाने से एक पुराने विवाद में समझौते के लिए फोन आया था। पिता से चर्चा करने के बाद सौरभ अपनी स्कूटी से थाने के लिए रवाना हुए। अभी वह घर से थोड़ी दूर ही पहुंचे थे कि स्कूटर सवार तीन नकाबपोश युवकों ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। जैसे ही सौरभ सड़क पर गिरे, बदमाशों ने उन पर डंडों से (Physical Violence Incident) शुरू कर दिया। शोर मचने पर जब आसपास के लोग इकट्ठा होने लगे, तो हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
अस्पताल में भर्ती विधायक पुत्र की हालत गंभीर
हमले में सौरभ बेहड़ के हाथ और कमर में गंभीर चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद उन्हें रुद्रपुर के फुटेला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका उपचार कर रही है। विधायक तिलकराज बेहड़ ने बताया कि उनके बेटे के हाथ का एक्सरे कराया गया है और (Emergency Medical Treatment) दी जा रही है। चोटें काफी गहरी हैं, जिसके कारण सौरभ को काफी दर्द और बेचैनी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में समर्थकों का तांता लगा हुआ है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
विधायक बेहड़ का सरकार और पुलिस को अल्टीमेटम
अपने बेटे को लहूलुहान हालत में देखकर विधायक तिलकराज बेहड़ का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने बेहद तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा कि वह कमजोर नहीं हैं और अगर पुलिस या सरकार आरोपियों को नहीं ढूंढ पाई, तो वह खुद उन्हें पाताल से भी खोज निकालेंगे। इस (Public Safety Concern) पर अपनी व्यथा साझा करते हुए उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि एक पिता के लिए अपने बेटे पर हुआ हमला बर्दाश्त करना मुमकिन नहीं है। उन्होंने मामले का जल्द से जल्द खुलासा करने की मांग की है।
पुराने विवाद और रंजिश का एंगल
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में सौरभ बेहड़ और कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पहले भी किसी मुद्दे पर विवाद हुआ था। उस समय दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस एफआईआर दर्ज कराई गई थी। विधायक का आरोप है कि (Criminal Conspiracy Allegations) के तहत उनके बेटे को समझौते के नाम पर थाने बुलाया गया और रास्ते में घात लगाकर हमला किया गया। पुलिस अब उस फोन कॉल की भी जांच कर रही है जिसके जरिए सौरभ को घर से बाहर बुलाया गया था।
मुख्यमंत्री धामी ने विधायक से की फोन पर बात
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधायक तिलकराज बेहड़ से फोन पर बात की। मेयर विकास शर्मा ने अस्पताल पहुंचकर मुख्यमंत्री को घटना की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने इस (State Government Response) के जरिए आश्वासन दिया कि दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की जाएं और सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सीसीटीवी फुटेज और साक्ष्यों की तलाश
एसएसपी मणिकांत मिश्रा के निर्देश पर ट्रांजिट कैंप पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस ने संबंधित डीवीआर को अपने कब्जे में ले लिया है ताकि (Digital Evidence Tracking) के जरिए हमलावरों की पहचान की जा सके। पुलिस नकाबपोशों के भागने वाले रूट की मैपिंग कर रही है। हालांकि, देर रात तक इस मामले में औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया था, क्योंकि परिवार फिलहाल सौरभ के इलाज पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
नेताओं का अस्पताल में जमावड़ा और आक्रोश
सौरभ बेहड़ पर हमले की खबर मिलते ही पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल और भाजपा विधायक शिव अरोरा भी अस्पताल पहुंचे। ठुकराल ने साफ शब्दों में कहा कि अगर आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे। विपक्ष और सत्तापक्ष के नेताओं ने एक स्वर में इस (Political Law Disorder) की निंदा की है। समर्थकों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए अस्पताल परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
उत्तराखंड में कानून व्यवस्था पर उठते सवाल
इस घटना ने उत्तराखंड के शांत माने जाने वाले मैदानी इलाकों में बढ़ते अपराध की ओर सबका ध्यान खींचा है। एक विधायक के बेटे के साथ सरेआम ऐसी वारदात होना (Internal Security Challenge) को दर्शाता है। जनता के बीच यह संदेश जा रहा है कि जब जनप्रतिनिधियों के परिजन ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी का क्या होगा। अब पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव है कि वह जल्द से जल्द नकाबपोशों का पर्दाफाश करे और इस साजिश के पीछे छिपे असली चेहरों को बेनकाब करे।



