LandAllotment – शहीद सैनिकों के परिजनों को जमीन देने की नई व्यवस्था तय…
LandAllotment – राज्य के जस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने शहीद सैनिकों के आश्रितों को सरकारी जमीन बंदोबस्त देने की प्रक्रिया को लेकर एक नई, स्पष्ट और एकरूप व्यवस्था लागू कर दी है। विभागीय स्तर पर गठित समिति की सिफारिशों के बाद जारी इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध में प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों के परिवारों को सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन के लिए भूमि संबंधी सहायता समय पर मिल सके। नई व्यवस्था के तहत पात्र आश्रितों को उनके गृह जिले में निर्धारित मानकों के अनुसार भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

शहीदों के परिवारों के लिए तय मानक
नई प्रक्रिया के अनुसार, युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों को उनके गृह जिला स्थित गृह प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कार्य के लिए एक एकड़ सरकारी जमीन या आवासीय उपयोग के लिए पांच डिसमिल भूमि बंदोबस्त के रूप में दी जाएगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि भूमि का चयन पूरी तरह विवादमुक्त और कानूनी अड़चनों से रहित होना चाहिए, ताकि भविष्य में परिवारों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सरकार की मंशा और स्पष्ट संदेश
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस निर्णय को शहीदों के प्रति राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि शहीद परिवारों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का स्थायी आधार उपलब्ध कराना है। इसी सोच के तहत बंदोबस्ती की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और व्यवहारिक बनाया गया है, ताकि पात्र परिवारों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े।
पात्रता से जुड़ी जरूरी शर्तें
विभागीय सचिव जय सिंह द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यह सुविधा उन्हीं मामलों में दी जाएगी, जहां संबंधित सैनिक ने कम से कम छह माह तक लगातार सेवा दी हो और सेवा के दौरान युद्ध में वीरगति प्राप्त की हो। बंदोबस्त की गई जमीन पर आश्रितों से सलामी ली जाएगी, हालांकि पहले पांच वर्षों तक वार्षिक लगान नहीं लिया जाएगा। इससे शुरुआती वर्षों में परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
पैरा मिलिट्री बलों को भी दायरे में शामिल किया गया
नई व्यवस्था में केवल थलसेना, नौसेना और वायुसेना तक ही सीमित न रहकर अन्य सुरक्षा बलों को भी शामिल किया गया है। युद्धकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स, बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स, बॉर्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी, होमगार्ड और असम राइफल्स के जवान यदि युद्ध में शहीद होते हैं, तो उनके आश्रित भी इस भूमि बंदोबस्ती के पात्र होंगे। इसके लिए संबंधित बोर्ड की अनुशंसा और न्यूनतम छह माह की संतोषजनक सेवा का प्रमाणपत्र आवश्यक होगा।
राज्य निवास और निजी भूमि से जुड़ा प्रावधान
निर्देशों में यह शर्त भी जोड़ी गई है कि भूमि बंदोबस्ती से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आश्रित बिहार राज्य का निवासी हो। साथ ही, यदि आवासीय उद्देश्य के लिए आवेदन किया गया है और आश्रित के पास पहले से निजी आवासीय जमीन मौजूद पाई जाती है, तो उसे इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। सरकार का उद्देश्य उन परिवारों को प्राथमिकता देना है, जिनके पास रहने के लिए स्वयं की जमीन नहीं है।
डीएम को रहेगा अंतिम अधिकार
भूमि बंदोबस्ती का अधिकार पहले की तरह जिलाधिकारी के पास ही रहेगा, लेकिन यह अधिकार केवल ग्रामीण क्षेत्रों की सरकारी और पूरी तरह विवादमुक्त जमीन तक सीमित होगा। चयनित भूमि भूदान, भू-हदबंदी, सैरात, कब्रिस्तान, श्मशान, धार्मिक स्थल, अतिक्रमण या किसी न्यायालयीन विवाद से मुक्त होनी चाहिए। विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस आदेश की तिथि से पहले भूमि बंदोबस्ती से जुड़े सभी पुराने निर्देश स्वतः समाप्त माने जाएंगे। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।



