AviationSafety – बारामती विमान हादसे के बाद अनियंत्रित हवाई पट्टियों पर सख्त जांच
AviationSafety – बारामती में हुए विमान हादसे के बाद केंद्र सरकार ने देशभर में फैली अनियंत्रित हवाई पट्टियों को लेकर व्यापक जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस पहल का उद्देश्य उन हवाई पट्टियों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना है, जो अब तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के प्रत्यक्ष नियमन से बाहर रही हैं। सरकार इन हवाई पट्टियों के लिए एक समान और स्पष्ट नियमावली बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक को रोका जा सके।

400 से अधिक हवाई पट्टियां जांच के दायरे में
सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश में 400 से ज्यादा ऐसी हवाई पट्टियां मौजूद हैं, जिनका संचालन या तो राज्य सरकारों, निजी संस्थाओं या फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों द्वारा किया जाता है। इन पर नियमित व्यावसायिक उड़ानें नहीं होतीं, लेकिन चार्टर विमानों, राजनीतिक गतिविधियों और प्रशिक्षण उड़ानों के लिए इनका उपयोग किया जाता है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि इन हवाई पट्टियों पर बुनियादी ढांचा, रनवे की स्थिति और परिचालन प्रक्रियाएं कितनी सुरक्षित हैं।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और आपात सुविधाओं की होगी समीक्षा
जांच का एक अहम हिस्सा इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑडिट से जुड़ा है। इसमें रनवे मेंटिनेंस, विमान पार्किंग क्षेत्र, संचार व्यवस्था और अग्निशमन सुविधाओं की उपलब्धता का मूल्यांकन किया जाएगा। कई हवाई पट्टियों पर न तो आधुनिक संचार प्रणाली है और न ही किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन। इसके अलावा यह भी परखा जाएगा कि स्थानीय प्रशासन और हवाई पट्टी प्रबंधन के बीच समन्वय किस स्तर पर है।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अनुपस्थिति बनी चिंता
इन अनियंत्रित हवाई पट्टियों की एक बड़ी समस्या एयर ट्रैफिक कंट्रोल सुविधा का न होना है। अधिकांश जगहों पर उड़ानों की आवाजाही आपसी समन्वय और दृश्य संकेतों के आधार पर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था जोखिम भरी हो सकती है, खासकर तब जब मौसम खराब हो या एक से अधिक विमान एक ही समय पर संचालन कर रहे हों। इसी कारण सरकार इन हवाई पट्टियों के लिए न्यूनतम सुरक्षा मानकों को अनिवार्य बनाने पर विचार कर रही है।
बारामती हादसे के बाद तेज हुई प्रक्रिया
28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। इस दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मृत्यु हो गई थी, जिसके बाद विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे। हादसे के तुरंत बाद DGCA ने हवाई अड्डों और हवाई पट्टियों पर लागू सेफ्टी प्रोटोकॉल की समीक्षा शुरू कर दी और संभावित खामियों की पहचान पर जोर दिया।
नियमों को एकीकृत करने की तैयारी
सरकार का प्रस्ताव है कि अनियंत्रित हवाई पट्टियों के लिए अलग-अलग राज्यों में लागू नियमों को एकीकृत किया जाए। नई व्यवस्था के तहत इन हवाई पट्टियों की निगरानी DGCA और संबंधित राज्य सरकारें मिलकर करेंगी। इससे न केवल जवाबदेही तय होगी, बल्कि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई भी संभव हो सकेगी।
अजित पवार की मौत पर उठे सवाल
इस बीच, हादसे की परिस्थितियों को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। एनसीपी (SP) नेता और विधायक रोहित पवार ने हाल ही में कहा कि दुर्घटना को लेकर कई तरह के संदेह हैं। उन्होंने संकेत दिया कि 10 फरवरी को मुंबई में इस विषय पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी, जिसमें दुर्घटना के कारणों और घटनाक्रम पर चर्चा की जाएगी। रोहित पवार के अनुसार, इस हादसे से जुड़े कई पहलुओं पर अब भी स्पष्टता की आवश्यकता है।
आगे की राह
सरकार और विमानन नियामक एजेंसियों के लिए यह जांच एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। यदि अनियंत्रित हवाई पट्टियों के संचालन में मौजूद कमियों को समय रहते दूर किया जाता है, तो भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। आने वाले महीनों में इस जांच के निष्कर्ष और नई नियमावली देश की विमानन सुरक्षा नीति की दिशा तय कर सकती है।



