PawanSingh – तलाक मामले में फिर टली सुलह की सुनवाई
PawanSingh – भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता और गायक पवन सिंह तथा उनकी पत्नी ज्योति सिंह के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। कुटुंब न्यायालय की पहल पर एक बार फिर काउंसिलिंग की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन निर्धारित तारीख पर दोनों पक्ष आमने-सामने नहीं आ सके। बुधवार को ज्योति सिंह अदालत पहुंचीं, जबकि पवन सिंह बीमारी का हवाला देते हुए उपस्थित नहीं हो सके। ऐसे में प्रस्तावित पुनः काउंसिलिंग सत्र नहीं हो पाया और मामला अगली तारीख पर टल गया।

अदालत ने दी नई तारीख
ज्योति सिंह के अधिवक्ता आदित्य नारायण सिंह ने बताया कि न्यायालय ने 11 फरवरी को रीकाउंसिलिंग की तिथि तय की थी। आदेश के अनुरूप उनकी मुवक्किल अदालत में पेश हुईं। दूसरी ओर, पवन सिंह की ओर से स्वास्थ्य खराब होने और अस्पताल में भर्ती रहने की सूचना दी गई। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए अब 24 फरवरी की नई तारीख निर्धारित की है। उस दिन दोनों पक्षों की उपस्थिति में आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
2022 से जारी है कानूनी प्रक्रिया
पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच तलाक का मामला वर्ष 2022 से न्यायालय में विचाराधीन है। इससे पहले भी अदालत की पहल पर काउंसिलिंग कराई गई थी, ताकि आपसी सहमति से समाधान निकल सके। हालांकि कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। दोनों के वैवाहिक जीवन में मतभेद की खबरें लंबे समय से सामने आती रही हैं और मामला अब विधिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।
चुनाव के दौरान दिखी थी नजदीकी
लोकसभा चुनाव से पहले दोनों को कुछ सार्वजनिक अवसरों पर साथ देखा गया था, जिससे सुलह की संभावना को लेकर चर्चा तेज हुई थी। उस समय माना जा रहा था कि आपसी मतभेद दूर हो सकते हैं। लेकिन बाद में फिर से विवाद गहराने की खबरें आईं और मामला न्यायालय में लंबित ही रहा। अदालत की ओर से बार-बार प्रयास किए जा रहे हैं कि बातचीत के जरिए समाधान निकले, पर फिलहाल स्थिति यथावत बनी हुई है।
तलाक अर्जी और भरण-पोषण की मांग
जानकारी के अनुसार पवन सिंह ने 9 अक्टूबर 2021 को आरा स्थित फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी। इसके बाद 28 अप्रैल 2022 को ज्योति सिंह अदालत में उपस्थित हुईं और अंतरिम भरण-पोषण की मांग रखी। उसी समय से यह प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया में है। दोनों पक्षों के वकील अदालत में अपने-अपने तर्क प्रस्तुत कर रहे हैं और अगली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं।
अदालत की प्राथमिकता सुलह
कुटुंब न्यायालय आमतौर पर वैवाहिक विवादों में पहले सुलह की संभावना तलाशता है। इसी क्रम में पुनः काउंसिलिंग की पहल की गई है। न्यायालय का उद्देश्य यह है कि यदि आपसी बातचीत से समाधान संभव हो तो उसे प्राथमिकता दी जाए। अब 24 फरवरी की तारीख अहम मानी जा रही है, जब दोनों पक्षों की मौजूदगी में आगे की दिशा तय हो सकती है। फिलहाल यह मामला कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है और अदालत के निर्णय पर सबकी नजरें टिकी हैं।



