MahaShivratriFashion – महाशिवरात्रि पर पहनावे के रंगों का महत्व
MahaShivratriFashion – महाशिवरात्रि हिंदू आस्था का एक प्रमुख पर्व है, जिसे भगवान शिव की उपासना के विशेष दिन के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और श्रद्धा से की गई आराधना विशेष फल देती है। मंदिरों में रौनक रहती है, घरों में भोग बनते हैं और भक्त पूरे मन से शिव आराधना में लीन रहते हैं। इस पावन अवसर पर केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि पहनावे को भी विशेष महत्व दिया जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के साथ-साथ अब रंगों को लेकर मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर भी चर्चा होने लगी है। विशेषज्ञों के अनुसार, कपड़ों के रंग व्यक्ति की मनोदशा और ऊर्जा स्तर को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में महाशिवरात्रि के दिन चुने गए रंग न केवल धार्मिक भावना से जुड़े होते हैं, बल्कि मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

नीला रंग और शिव से जुड़ी आस्था
धार्मिक परंपराओं में भगवान शिव को नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र मंथन की कथा में विषपान के बाद उनका कंठ नीला हो गया था, इसलिए नीला रंग उनसे विशेष रूप से जोड़ा जाता है। कई श्रद्धालु मानते हैं कि महाशिवरात्रि के दिन नीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। यह रंग आकाश और गहराई का प्रतीक है, जो व्यापकता और स्थिरता की भावना देता है। रंगों के प्रभाव पर किए गए अध्ययन भी बताते हैं कि नीला रंग मन को शांत करता है और तनाव कम करने में सहायक हो सकता है। पूजा के दौरान मानसिक एकाग्रता जरूरी होती है, ऐसे में हल्के या मध्यम नीले रंग के कपड़े संतुलन और सादगी का भाव पैदा करते हैं। यही वजह है कि इस दिन नीले परिधान को प्राथमिकता दी जाती है।
हरे रंग का सुकून भरा प्रभाव
महाशिवरात्रि पर हरे रंग के कपड़े पहनना भी कई लोग शुभ मानते हैं। हरा रंग प्रकृति, ताजगी और संतुलन का प्रतीक है। धार्मिक संदर्भों में इसे सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। मनोविज्ञान के अनुसार, हरा रंग आंखों को आराम देता है और मन को स्थिर रखने में मदद करता है। दिन के समय यदि हल्के हरे रंग के कपड़े पहने जाएं तो यह सादगी और शांति का एहसास कराते हैं। मंदिर दर्शन या घर की पूजा में इस रंग का चयन संयमित और सौम्य व्यक्तित्व को दर्शाता है। खासकर वसंत ऋतु के आसपास आने वाले इस पर्व में हरा रंग मौसम के अनुरूप भी लगता है। इसलिए कई परिवारों में इस दिन हरे परिधानों को भी प्राथमिकता दी जाती है।
लाल, पीला और सफेद का धार्मिक महत्व
नीले और हरे के अलावा कुछ अन्य रंग भी इस दिन शुभ माने जाते हैं। लाल और पीला रंग परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना से जुड़े रहे हैं। विशेषकर विवाहित महिलाएं इन रंगों के वस्त्र धारण कर मंदिर जाती हैं। लाल रंग ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है, जबकि पीला रंग आस्था और पवित्रता से जुड़ा माना जाता है। वहीं सफेद रंग सादगी और शांति का संदेश देता है। कई लोग पूजा के समय सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनना पसंद करते हैं क्योंकि यह मानसिक स्थिरता और शुद्धता का भाव जगाता है। हालांकि रंगों का चयन व्यक्तिगत पसंद पर भी निर्भर करता है, लेकिन परंपरा और सांस्कृतिक मान्यताएं अब भी लोगों के निर्णय में अहम भूमिका निभाती हैं।
किन रंगों से दूरी रखने की सलाह
कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि जैसे पावन अवसर पर बहुत अधिक गहरे या भड़कीले रंगों से बचने की सलाह दी जाती है। काला, भूरा या धूसर जैसे रंगों को पूजा के दौरान कम प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि यह व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है, फिर भी कई लोग इस दिन हल्के और शांत रंगों का चयन करना बेहतर समझते हैं। रंगों के मनोवैज्ञानिक प्रभाव की बात करें तो बहुत गहरे रंग कुछ लोगों में गंभीरता या उदासी की भावना भी उत्पन्न कर सकते हैं। इसलिए त्योहार के माहौल के अनुरूप संतुलित और सादे रंगों को चुनना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
पारंपरिक परिधानों की प्राथमिकता
महाशिवरात्रि धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा पर्व है, इसलिए इस दिन पारंपरिक परिधान पहनना सामान्य बात है। महिलाएं साड़ी, सलवार-सूट या अन्य पारंपरिक पोशाक पहन सकती हैं। अविवाहित युवतियों के लिए कुर्ती, अनारकली या लहंगा जैसे विकल्प भी लोकप्रिय हैं। पुरुषों के बीच कुर्ता-पायजामा या धोती-कुर्ता पहनने की परंपरा रही है। परिधान का चयन करते समय सादगी और सहजता का ध्यान रखना बेहतर माना जाता है, ताकि पूजा के दौरान कोई असुविधा न हो। कुल मिलाकर महाशिवरात्रि का उद्देश्य आस्था और आत्मचिंतन है, इसलिए पहनावे में भी यही भावना झलकनी चाहिए।



