UttarakhandPension – राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन में बड़ा इजाफा
UttarakhandPension – उत्तराखंड सरकार ने राज्य गठन आंदोलन से जुड़े लोगों के लिए एक अहम फैसला लिया है। गुरुवार को घोषित इस निर्णय के तहत आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को दी जा रही मासिक पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। सरकार का कहना है कि यह कदम उन लोगों के योगदान को सम्मान देने के लिए उठाया गया है, जिन्होंने अलग उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया था।

अलग-अलग श्रेणियों में बढ़ी पेंशन
अधिकारियों के मुताबिक, आंदोलन के दौरान सात दिन तक जेल में रहे या घायल हुए लोगों को अब हर महीने 7,000 रुपये पेंशन मिलेगी। पहले यह राशि 6,000 रुपये थी। इसी तरह अन्य पात्र आंदोलनकारियों की पेंशन 4,500 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रतिमाह कर दी गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी श्रेणियों में न्यूनतम 1,000 रुपये की वृद्धि सुनिश्चित की गई है।
गंभीर रूप से प्रभावित आंदोलनकारियों को विशेष राहत
राज्य आंदोलन के दौरान स्थायी रूप से विकलांग हुए या पूरी तरह से बिस्तर पर निर्भर आंदोलनकारियों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। इस श्रेणी के लाभार्थियों की मासिक पेंशन 20,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि उनकी विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर की गई है, ताकि उन्हें बेहतर आर्थिक सहारा मिल सके।
आश्रितों को भी मिलेगा बढ़ा हुआ लाभ
आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कार्यकर्ताओं के परिवारों को भी राहत दी गई है। पहले उनके आश्रितों को 3,000 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती थी, जिसे अब बढ़ाकर 5,500 रुपये कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि यह कदम उन परिवारों के प्रति सम्मान और सहयोग का संकेत है, जिन्होंने राज्य निर्माण की प्रक्रिया में अपूरणीय क्षति झेली।
सरकार ने बताया निर्णय का उद्देश्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों के सम्मान और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, यह फैसला केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि उन संघर्षों की स्वीकृति भी है, जिनकी बदौलत उत्तराखंड का गठन संभव हो सका। सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में भी आंदोलनकारियों से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया जाएगा।
वित्तीय प्रभाव और प्रशासनिक तैयारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पेंशन वृद्धि से राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ जरूर पड़ेगा, लेकिन इसे सामाजिक दायित्व के रूप में देखा जा रहा है। संबंधित विभागों को संशोधित दरों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। लाभार्थियों को बढ़ी हुई राशि निर्धारित समय पर मिल सके, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी गई है।
राज्य गठन आंदोलन उत्तराखंड के इतिहास का अहम अध्याय रहा है। ऐसे में पेंशन में वृद्धि का यह निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे हजारों आंदोलनकारियों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।



