झारखण्ड

JPSCRecruitment – सहायक प्राध्यापक चयन सूची पर उठे गंभीर सवाल

JPSCRecruitment – झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा सहायक प्राध्यापक (एनेस्थिसियोलॉजी) पद की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। विज्ञापन संख्या 08/23 के तहत जारी मेधा सूची को लेकर अभ्यर्थियों ने नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राज्य सरकार में कार्यरत योग्य चिकित्सकों को प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

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नियमों में इन सर्विस को प्राथमिकता का प्रावधान

विज्ञापन के अनुसार कुल आठ पदों पर नियुक्ति की जानी थी। झारखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा, नियुक्ति, प्रोन्नति एवं सेवाशर्त (द्वितीय संशोधन) नियमावली 2021 के तहत पहले राज्य स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सकों से रिक्तियां भरने का प्रावधान है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस व्यवस्था का पालन नहीं किया गया। मेधा सूची में ऐसे चिकित्सकों के नाम शामिल हैं, जो राज्य से बाहर कार्यरत बताए जा रहे हैं, जिनमें कुछ बिहार से जुड़े हैं।

चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल

इन सर्विस चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें न तो अयोग्य ठहराने का कोई कारण बताया गया और न ही उनके आवेदन पर स्पष्ट टिप्पणी की गई। उनका तर्क है कि चयन प्रक्रिया में यदि किसी उम्मीदवार को बाहर रखा जाता है, तो कारणों की जानकारी देना आवश्यक है। इस मामले में आयोग की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है, जिससे असंतोष बढ़ा है।

कटऑफ कम, फिर भी चयन से बाहर

कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग से पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि निर्धारित कटऑफ 18 अंक था, जबकि उनके कुल अंक 30 से अधिक बनते हैं। उनका दावा है कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के मानकों को वे पूरी तरह पूरा करते हैं। कई अभ्यर्थियों ने आवेदन के साथ अनुभव प्रमाण पत्र, विभागीय अनापत्ति प्रमाण पत्र और विषय से संबंधित शोध पत्र भी संलग्न किए थे। इसके बावजूद मेधा सूची में उनका नाम नहीं आना उन्हें चौंकाने वाला लग रहा है।

अंकों के वितरण पर भी उठे सवाल

चयन प्रक्रिया में एमबीबीएस और स्नातकोत्तर डिग्री के अंकों के अलावा साक्षात्कार के लिए छह अंक निर्धारित थे। साथ ही, राज्य सेवा में पांच वर्ष पूरे करने वाले इन सर्विस उम्मीदवारों को अतिरिक्त दस अंक का प्रावधान था। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि अंक वितरण नियमों के अनुसार हुआ होता, तो इन सर्विस उम्मीदवारों को स्वाभाविक रूप से बढ़त मिलनी चाहिए थी। ऐसे में बाहरी उम्मीदवारों का चयन कैसे हुआ, यह स्पष्ट नहीं है।

आयोग ने कहा, जानकारी जुटाई जा रही

जेपीएससी के सचिव संदीप कुमार ने बताया कि मामले की पूरी जानकारी एकत्र की जा रही है। उन्होंने स्वीकार किया कि नियमों के अनुसार राज्य स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सकों को प्राथमिकता मिलनी थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि विस्तृत तथ्यों की समीक्षा के बाद ही आधिकारिक प्रतिक्रिया दी जाएगी।

फिलहाल चयन प्रक्रिया को लेकर असंतोष बना हुआ है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि आयोग इस मामले की समीक्षा कर स्पष्टता लाएगा। यदि नियमों में किसी तरह की चूक हुई है, तो उसके सुधार की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

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