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TradePolicy – व्यापार समझौतों पर मोदी का यूपीए पर प्रहार

TradePolicy – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हालिया साक्षात्कार में पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस दौर में भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार वार्ताओं में मजबूती से अपना पक्ष रखने की स्थिति में नहीं था। उनका कहना है कि नीतिगत अस्थिरता और आर्थिक प्रबंधन की कमियों के कारण कई बातचीत शुरू तो हुईं, लेकिन ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकीं।

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पूर्व सरकार की नीतियों पर टिप्पणी

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले भारत वैश्विक व्यापार मंच पर उतनी स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ आगे नहीं बढ़ पा रहा था, जितनी आज दिखाई देती है। उनके अनुसार, उस समय शुरू हुई कई वार्ताएं बीच में ही ठहर गईं। उन्होंने संकेत दिया कि आर्थिक ढांचे की कमजोरी के कारण बातचीत का माहौल अनुकूल नहीं बन पाया।

उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत अर्थव्यवस्था ही प्रभावी कूटनीति की आधारशिला होती है। यदि घरेलू मोर्चे पर स्पष्ट दिशा न हो, तो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दीर्घकालिक समझौते करना कठिन हो जाता है।

हालिया व्यापार समझौतों का उल्लेख

मोदी ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि इनसे भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को नए अवसर मिले हैं। विशेषकर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में निर्यात के लिए शुल्क में कमी या लगभग शून्य शुल्क की व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा बढ़ी है।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, इन समझौतों से भारतीय उत्पादों को उन बाजारों में बेहतर पहुंच मिली है, जहां पहले शुल्क बाधाएं अधिक थीं। उनका कहना है कि यह केवल कागजी उपलब्धि नहीं, बल्कि घरेलू उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का परिणाम है।

नीति-आधारित शासन पर जोर

उन्होंने कहा कि सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने नीतिगत स्थिरता, पूर्वानुमेय व्यवस्था और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण पर बल दिया। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और भारत को विश्वसनीय आर्थिक भागीदार के रूप में देखा जाने लगा।

प्रधानमंत्री ने दावा किया कि एक नियम-आधारित प्रणाली और पारदर्शी आर्थिक ढांचा तैयार करने से वैश्विक निवेशकों को स्पष्ट संकेत मिला कि भारत दीर्घकालिक साझेदारी के लिए तैयार है।

विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को बढ़ावा

मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में किए गए सुधारों से विनिर्माण और सेवा दोनों क्षेत्रों को मजबूती मिली है। उनका मानना है कि उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा में वृद्धि ने भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार के अनुरूप ढाला है।

उन्होंने यह भी कहा कि जब घरेलू अर्थव्यवस्था आत्मविश्वास से आगे बढ़ती है, तो अन्य देश भी सहयोग के लिए तत्पर होते हैं। उनके अनुसार, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और स्थिर नीति ढांचे ने कई देशों को व्यापार समझौतों के लिए सकारात्मक रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया।

यूरोपीय संघ समझौते का उदाहरण

प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते का हवाला देते हुए कहा कि इस पर चर्चा पहले भी हुई थी, लेकिन अंतिम रूप उनकी सरकार के दौरान दिया गया। उनके मुताबिक, यह इस बात का संकेत है कि स्पष्ट रणनीति और स्थिर नेतृत्व से जटिल वार्ताएं भी सफल हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने मुक्त व्यापार समझौतों का एक सुविचारित नेटवर्क तैयार किया है, जिसका उद्देश्य दीर्घकालिक आर्थिक हितों को सुरक्षित करना है।

राजनीतिक बहस का नया अध्याय

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी से एक बार फिर आर्थिक नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। जहां सरकार अपने सुधारों को उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं विपक्ष इन दावों पर सवाल उठा सकता है।

फिलहाल, सरकार का दावा है कि हालिया व्यापार समझौते भारतीय उद्योग, खासकर एमएसएमई क्षेत्र, के लिए नए अवसरों का मार्ग खोल रहे हैं और इससे वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत हुई है।

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