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MutualFunds – फरवरी में तीन साल बाद बिकवाल बने फंड

MutualFunds – फरवरी के शुरुआती कारोबार में एक दिलचस्प रुझान देखने को मिला है। लंबे समय तक लगातार खरीदारी करने वाले म्यूचुअल फंड इस महीने शुद्ध रूप से बिकवाली की स्थिति में दिखाई दिए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक फंड हाउस लगभग 4,100 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि पिछले तीन वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब वे नेट सेलर बने हैं।

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लगातार खरीदारी के बाद अचानक बदलाव

इससे पहले अप्रैल 2023 में फंडों ने 4,532 करोड़ रुपये से अधिक की शुद्ध बिक्री की थी। उसके बाद करीब 34 महीनों तक वे लगातार बाजार में खरीदारी करते रहे। हाल ही में जनवरी महीने में ही फंडों ने 42,355 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। पूरे 2025 के दौरान उनकी कुल खरीदारी लगभग 4.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंची थी। ऐसे में फरवरी की बिकवाली हालिया ट्रेंड से अलग नजर आ रही है।

बिकवाली की वजह क्या है

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुझान निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर पैसे निकालने का संकेत नहीं देता। जानकारों के अनुसार, यह कदम पोर्टफोलियो में बदलाव और पुनर्संतुलन का हिस्सा हो सकता है। कई फंड प्रबंधक कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों से पूंजी निकालकर अपेक्षाकृत मजबूत और बड़ी कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं।

कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि जब विदेशी निवेशक पहले बाजार से निकले थे, उस दौरान खरीदे गए कुछ शेयरों में अब मुनाफावसूली की जा रही है। फिलहाल व्यवस्थित निवेश योजनाओं के जरिये निवेशकों के पैसे निकालने का कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है।

बिकवाली का आकार कितना अहम

करीब 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करने वाले इस उद्योग के लिए 4,100 करोड़ रुपये की बिक्री को बहुत बड़ा नहीं माना जा रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह राशि कुल एसेट बेस के मुकाबले सीमित है और संभव है कि यह कुछ चुनिंदा योजनाओं या शेयरों तक ही सीमित हो। इसलिए इसे व्यापक घबराहट का संकेत नहीं समझा जाना चाहिए।

इंडेक्स बदलाव का असर

फरवरी की शुरुआत में प्रमुख सूचकांकों की समीक्षा और रीबैलेंसिंग भी हुई है। ऐसे मौकों पर फंडों को अपने पोर्टफोलियो में तकनीकी बदलाव करने पड़ते हैं। इंडेक्स में शामिल या बाहर होने वाले शेयरों के कारण भी खरीद-बिक्री का दबाव बनता है। यह भी संभव है कि मौजूदा बिकवाली का एक हिस्सा इसी प्रक्रिया से जुड़ा हो।

बाजार की मौजूदा तस्वीर

वर्तमान में व्यापक बाजार में असमान प्रदर्शन दिख रहा है। प्रमुख सूचकांक अपने उच्च स्तर से मामूली नीचे हैं, लेकिन कई मझोली और छोटी कंपनियों के शेयर अपने 52-सप्ताह के उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में ही रुचि दिखा रहे हैं।

भू-राजनीतिक परिस्थितियां, वैश्विक आर्थिक संकेत और रुपये की चाल भी निवेश रुख को प्रभावित कर रहे हैं। कुछ निवेशकों ने हाल के महीनों में गोल्ड आधारित योजनाओं, बॉन्ड फंड और हाइब्रिड विकल्पों की ओर रुख बढ़ाया है।

आगे की दिशा

अब नजर इस बात पर रहेगी कि इक्विटी फंडों में निवेश का प्रवाह स्थिर रहता है या नहीं। यदि निवेशकों की ओर से धन प्रवाह बना रहता है तो हालिया बिकवाली को केवल रणनीतिक बदलाव माना जाएगा। लेकिन यदि लगातार निकासी शुरू होती है तो बाजार पर इसका असर अलग हो सकता है। फिलहाल संकेत यही हैं कि यह कदम व्यापक घबराहट की बजाय पोर्टफोलियो प्रबंधन से जुड़ा है।

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