उत्तराखण्ड

DUCBForensicAudit – दून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की होगी गहन जांच

DUCBForensicAudit – देहरादून अर्बन कोऑपरेटिव बैंक में कथित वित्तीय अनियमितताओं के सामने आने के बाद अब मामले की विस्तृत जांच का रास्ता साफ हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक और संबंधित अर्बन कोऑपरेटिव बैंक प्राधिकरण ने बैंक का फॉरेंसिक ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। इससे पहले बैंक के लेन-देन पर रोक लगा दी गई थी, जिसके चलते हजारों खाताधारकों की रकम अटक गई। अनुमान है कि करीब नौ हजार ग्राहकों के लगभग 124 करोड़ रुपये प्रभावित हुए हैं।

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फॉरेंसिक ऑडिट में क्या होगी जांच

बैंक के सचिव बलबीर सिंह के अनुसार यह जांच सामान्य ऑडिट से अलग और अधिक व्यापक होगी। आरबीआई द्वारा नामित चार्टर्ड अकाउंटेंट या सक्षम अधिकारी 2014 से 2025 तक के सभी प्रमुख वित्तीय लेन-देन की समीक्षा करेंगे। विशेष रूप से यह देखा जाएगा कि बैंक में धन का प्रवाह किस स्रोत से हुआ और किन खातों में गया।

जांच में ऋण वितरण से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से पड़ताल की जाएगी। यह सत्यापित किया जाएगा कि जिन लोगों को ऋण दिया गया, उनके कागजात वैध थे या नहीं। बैंक प्रबंधन की भूमिका, आंतरिक नियंत्रण प्रणाली और निगरानी तंत्र की भी समीक्षा की जाएगी।

ग्राहकों की बढ़ी चिंता

लेन-देन पर रोक लगने के बाद आम खाताधारकों से लेकर संस्थागत ग्राहकों तक को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शादी, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए धन निकालने में असमर्थ लोग बैंक के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि नगर निगम से जुड़े ठेकेदारों और निजी संस्थानों की भी बड़ी राशि बैंक में जमा है। भुगतान अटकने से कई विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

पुराने आरोप और शिकायतें

कुछ शेयर होल्डरों का आरोप है कि बैंक में वर्षों से अनियमितताएं हो रही थीं, जिनकी शिकायतें समय-समय पर की गईं। आरोप यह भी है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता का अभाव रहा और कुछ पदों पर मनमाने ढंग से भर्ती की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन फॉरेंसिक ऑडिट में इन पहलुओं की भी जांच संभव है।

आरबीआई की भूमिका पर सवाल

बैंकिंग नियामक संस्थान द्वारा समय-समय पर ऑडिट किए जाने के बावजूद कथित गड़बड़ियां पहले क्यों नहीं सामने आईं, इसे लेकर भी चर्चा हो रही है। खाताधारक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

आगे की प्रक्रिया

अधिकारियों के अनुसार फॉरेंसिक ऑडिट की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि वित्तीय अनियमितता या धोखाधड़ी के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल बैंक के भविष्य और ग्राहकों की जमा राशि की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट स्थिति ऑडिट रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।

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