उत्तराखण्ड

Chardham Helicopter Service – नए DGCA नियमों के साथ सुरक्षित होगी हवाई यात्रा व्यवस्था

Chardham Helicopter Service – उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं को पहले से अधिक सुरक्षित, नियंत्रित और पारदर्शी बनाने की दिशा में इस वर्ष बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत केदारनाथ, बदरीनाथ समेत अन्य धामों के लिए संचालित होने वाली हेली सेवाएं अब सख्त नियमों और पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के दायरे में रहेंगी। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने इन बदलावों को लागू करने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।

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पहली बार तय होंगे विशेष कॉप्टर रूट

चारधाम क्षेत्र, विशेषकर केदारघाटी जैसे संवेदनशील इलाकों में उड़ानों के दौरान मानवीय भूल की संभावना को कम करने के लिए राज्य में पहली बार निश्चित कॉप्टर-रूट निर्धारित किए जा रहे हैं। भविष्य में सभी हेलीकॉप्टरों को इन्हीं तय हवाई मार्गों पर उड़ान भरनी होगी। इसका उद्देश्य उड़ानों को एक सुव्यवस्थित ढांचे में लाकर टकराव, दिशा भ्रम और जोखिमपूर्ण मूवमेंट की आशंका को न्यूनतम करना है।

लाइव ट्रैकिंग से होगी हर उड़ान की निगरानी

सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए घाटी में उड़ान भरने वाले प्रत्येक हेलीकॉप्टर में अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से हेलीकॉप्टर की लाइव लोकेशन को रियल टाइम में मॉनिटर किया जा सकेगा। इससे मौसम खराब होने, तय मार्ग से भटकने या किसी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देना संभव होगा। अधिकारियों का मानना है कि यह तकनीक दुर्घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाएगी।

यात्रियों की संख्या पर लगेगा नियंत्रण

इस वर्ष भीड़ प्रबंधन और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए हेलीकॉप्टर टिकटों की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत तक कटौती का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सीमित उड़ानों के जरिए संचालन को संतुलित रखने का प्रयास किया जा रहा है ताकि हेलीपैड, हवाई मार्ग और घाटी क्षेत्र पर अनावश्यक दबाव न पड़े। प्रशासन का फोकस कम लेकिन सुरक्षित उड़ानों पर रहेगा।

क्या होते हैं कॉप्टर-रूट और क्यों हैं जरूरी

कॉप्टर-रूट हेलीकॉप्टरों के लिए विशेष रूप से निर्धारित उड़ान पथ होते हैं, जिनका उपयोग मुख्य रूप से पहाड़ी और घाटी वाले क्षेत्रों में विजुअल फ्लाइट रूल्स के तहत किया जाता है। ये रूट कम ऊंचाई पर प्रतिबंधित या जोखिम वाले हवाई क्षेत्रों से बचते हुए सुरक्षित दिशा में उड़ान सुनिश्चित करते हैं। तय मार्ग होने से पायलटों के बीच समन्वय बेहतर होता है और दुर्घटना की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।

हेलीपोर्ट अब लाइसेंसिंग दायरे में

चारधाम यात्रा से जुड़े सहस्रधारा, केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे प्रमुख हेलीपोर्टों को अब DGCA के लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क के अंतर्गत लाया जाएगा। इससे इन हेलीपैड्स पर सुरक्षा मानकों, संचालन प्रक्रिया और यात्री सुविधाओं की नियमित निगरानी संभव हो सकेगी। यह कदम हवाई सेवाओं को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

यात्री सुविधाओं पर भी दिया जा रहा जोर

यात्रियों को बेहतर अनुभव देने के लिए प्रमुख हेलीपैड्स पर पैसेंजर टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण की योजना है। इसके अलावा मौसम खराब होने या तकनीकी कारणों से उड़ान बाधित होने की स्थिति में सुरक्षित आपात लैंडिंग के लिए अलग-अलग स्थानों पर इमरजेंसी हेलीपैड भी विकसित किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इन व्यवस्थाओं से चारधाम हेली सेवा अधिक भरोसेमंद और व्यवस्थित बनेगी।

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