RagiRecipe – घर पर मुलायम और पारंपरिक रागी मुड्डे बनाने का आसान तरीका
RagiRecipe – रागी मुड्डे दक्षिण भारत, खासकर कर्नाटक के घरों में रोज़ाना बनने वाली एक पारंपरिक डिश है। देखने में साधारण लेकिन पोषण के लिहाज़ से बेहद समृद्ध, यह व्यंजन अब पूरे देश में लोकप्रिय हो रहा है। फिंगर मिलेट यानी रागी को लंबे समय से कैल्शियम, फाइबर और आयरन का अच्छा स्रोत माना जाता है। सही तकनीक के साथ इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। अगर अक्सर रागी मुड्डे में गांठें पड़ जाती हैं या वह सख्त बन जाता है, तो कुछ छोटे लेकिन जरूरी स्टेप्स इस समस्या को दूर कर सकते हैं।

रागी मुड्डे का सांस्कृतिक महत्व
दक्षिण भारत के कई हिस्सों में रागी मुड्डे सिर्फ एक भोजन नहीं, बल्कि पारंपरिक खानपान का हिस्सा है। ग्रामीण इलाकों में इसे ऊर्जा देने वाला मुख्य आहार माना जाता है। खेतों में काम करने वाले लोग इसे खाने के बाद लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं। यही कारण है कि इसे पौष्टिक और संतुलित भोजन की श्रेणी में रखा जाता है।
रागी में मौजूद प्राकृतिक फाइबर पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। साथ ही इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होने के कारण यह हड्डियों के लिए लाभकारी माना जाता है। बदलती जीवनशैली के बीच लोग अब फिर से पारंपरिक अनाज की ओर लौट रहे हैं और रागी उसी दिशा में एक अहम विकल्प बनकर उभरा है।
मुलायम रागी मुड्डे बनाने की सही तकनीक
अक्सर लोग सीधे रागी का आटा उबलते पानी में डाल देते हैं, जिससे मिश्रण में गांठें पड़ जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्मूद टेक्सचर के लिए पहले स्लरी तैयार करना जरूरी है। इसके लिए आधा कप पानी में रागी का आटा डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि कोई गाठ न रहे।
इसके बाद एक भारी तले वाले बर्तन में बाकी पानी और थोड़ा घी डालकर उबाल लाया जाता है। स्वाद के अनुसार नमक मिलाया जा सकता है। जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे, तब आंच धीमी कर दें और तैयार स्लरी को धीरे-धीरे डालते जाएं। इस दौरान लगातार चलाते रहना बेहद जरूरी है। कुछ ही मिनटों में मिश्रण गाढ़ा होकर एक साथ इकट्ठा होने लगता है।
जब यह पैन छोड़ने लगे, तब इसे ढककर 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें। इस प्रक्रिया से रागी अच्छी तरह पकती है और उसका स्वाद निखरकर आता है।
सही आकार देने का तरीका
दम देने के बाद ढक्कन हटाकर मिश्रण को मजबूत चम्मच या लकड़ी के स्पैचुला से अच्छी तरह फेंटें। थोड़ी मेहनत के बाद इसका रंग हल्का चमकदार और बनावट लचीली दिखने लगती है। यही संकेत है कि मुड्डे तैयार हैं।
अब हाथों को हल्का गीला करें और गर्म मिश्रण से गोल आकार की बॉल बना लें। पारंपरिक तरीके में इन्हें हाथ से घुमाकर चिकना और एकसार बनाया जाता है। ध्यान रहे कि यह प्रक्रिया गर्म रहते हुए ही की जाए, ताकि सतह स्मूद रहे।
आवश्यक सामग्री
- रागी का आटा – 1 कप
- पानी – 2½ से 3 कप
- घी – आधा से 1 छोटा चम्मच
- नमक – स्वादानुसार (वैकल्पिक)
परोसने का पारंपरिक अंदाज़
रागी मुड्डे को आमतौर पर सांभर, दाल, सब्जी या चिकन करी के साथ परोसा जाता है। दक्षिण भारत में इसे करी में हल्का सा डुबोकर छोटे-छोटे टुकड़ों में खाया जाता है। यह भोजन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है, इसलिए वजन नियंत्रित करने वाले लोग भी इसे अपने आहार में शामिल करते हैं।
सेहत के नजरिए से क्यों खास है रागी
पोषण विशेषज्ञों के अनुसार रागी में मौजूद फाइबर और खनिज तत्व शरीर को संतुलित ऊर्जा देते हैं। यह ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रखने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा इसमें ग्लूटेन नहीं होता, इसलिए कई लोग इसे हल्के और सुपाच्य भोजन के रूप में पसंद करते हैं।
रोजमर्रा के खाने में थोड़े बदलाव के साथ रागी मुड्डे को शामिल करना आसान है। सही विधि अपनाने पर यह घर पर भी उतना ही मुलायम और स्वादिष्ट बन सकता है, जितना किसी पारंपरिक दक्षिण भारतीय रसोई में तैयार किया जाता है।



