TrumpTariffClaim – भारत-पाक तनाव पर ट्रंप के बयान से नई बहस
TrumpTariffClaim – अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि उनकी टैरिफ नीति ने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित बड़े सैन्य टकराव को रोकने में भूमिका निभाई। यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उनकी व्यापक टैरिफ व्यवस्था को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने छह बनाम तीन के बहुमत से कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति को एकतरफा टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।

ट्रंप ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए इसे निराशाजनक बताया और कहा कि उनकी आर्थिक रणनीति को गलत समझा गया है।
ट्रंप का दावा और भारत-पाक संदर्भ
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने टैरिफ को कूटनीतिक साधन की तरह इस्तेमाल किया और इससे कई अंतरराष्ट्रीय तनाव कम हुए। उन्होंने विशेष रूप से भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि कठोर आर्थिक संकेतों ने स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के नेतृत्व ने उनके हस्तक्षेप की सराहना की। हालांकि भारत ने लगातार यह रुख दोहराया है कि किसी भी प्रकार की तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। नई दिल्ली का कहना है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संवाद से संभव हुआ।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया
अदालत के फैसले के बाद ट्रंप ने कहा कि टैरिफ राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम उपकरण है और इसका उपयोग वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने न्यायालय के कुछ सदस्यों की आलोचना करते हुए कहा कि देशहित के व्यापक दृष्टिकोण को नजरअंदाज किया गया।
अदालत का निर्णय इस बात पर केंद्रित था कि आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का उपयोग सीमित परिस्थितियों में ही किया जा सकता है और इसे व्यापक व्यापारिक नीति के साधन के रूप में लागू नहीं किया जा सकता।
भारत का आधिकारिक रुख
भारत ने स्पष्ट किया है कि मई 2025 में बढ़े तनाव के दौरान दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच सीधी बातचीत से स्थिति सामान्य हुई। पहलगाम हमले के बाद शुरू हुए सैन्य अभियान और उसके बाद की घटनाओं को भारत ने द्विपक्षीय प्रक्रिया का परिणाम बताया है।
भारत का कहना है कि किसी बाहरी दबाव या मध्यस्थता की भूमिका नहीं थी। पाकिस्तान की ओर से भी आधिकारिक तौर पर ऐसे दावों की पुष्टि नहीं की गई है।
व्यापक राजनीतिक और आर्थिक संदर्भ
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब उनकी व्यापार नीति को न्यायिक चुनौती का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत के फैसले से अमेरिकी कार्यपालिका की व्यापारिक शक्तियों की सीमा स्पष्ट हो गई है।
वहीं, भारत-पाक संबंधों को लेकर दोनों देशों की आधिकारिक स्थिति पहले की तरह कायम है। क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दे पर बयानबाजी के बीच यह साफ है कि किसी भी संघर्ष विराम का औपचारिक आधार दोनों पक्षों के बीच सीधा संवाद ही रहा है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि व्यापार नीति और कूटनीति के दावे अक्सर घरेलू राजनीतिक बहस का हिस्सा बन जाते हैं, जबकि जमीनी हकीकत कई स्तरों पर तय होती है।



