बिहार

TejashwiYadav – परीक्षा में देरी पर छात्रा की मौत से तेज हुई सियासत

TejashwiYadav – बिहार विधानसभा में शुक्रवार को दसवीं की छात्रा कोमल कुमारी की आत्महत्या का मामला गूंजता रहा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कुछ मिनट की देरी के कारण एक छात्रा को परीक्षा केंद्र में प्रवेश न देना बेहद संवेदनहीन फैसला था, जिसका परिणाम दुखद रहा।

tejashwi yadav exam delay row

मसौढ़ी थाना क्षेत्र की रहने वाली कोमल कथित तौर पर मैट्रिक की परीक्षा देने जा रही थी। रास्ते में जाम के कारण वह निर्धारित समय से कुछ मिनट देर से पहुंची। आरोप है कि केंद्र के गेट बंद हो चुके थे और उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। बाद में उसने कथित रूप से ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी।

विपक्ष का सरकार पर हमला

तेजस्वी यादव ने पहले सोशल मीडिया और फिर विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि एक बेटी का जीवन किसी भी प्रशासनिक नियम से अधिक मूल्यवान है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अव्यवस्था और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं बार-बार सामने आती हैं, लेकिन सरकार प्रभावी समाधान नहीं निकाल पा रही है।

उन्होंने मांग की कि कोमल के परिवार को तुरंत मुआवजा दिया जाए और परीक्षा नियमों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए। उनका कहना था कि यदि सड़क जाम जैसी परिस्थितियों के कारण छात्र कुछ मिनट देर से पहुंचते हैं, तो उन्हें प्रवेश से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

परीक्षा केंद्रों पर सख्ती पर सवाल

इन दिनों बिहार में मैट्रिक परीक्षाएं चल रही हैं। परीक्षा केंद्रों पर समय की पाबंदी को लेकर सख्त व्यवस्था लागू है। एक मिनट की देरी पर भी प्रवेश न देने के मामले सामने आए हैं। कई जिलों से ऐसे दृश्य सामने आए हैं, जहां छात्र-छात्राएं बंद गेट के बाहर रोते दिखाई दिए।

तेजस्वी ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए लचीलेपन की गुंजाइश होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जाम और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की खामियों का खामियाजा विद्यार्थियों को नहीं भुगतना चाहिए।

सरकार से जवाबदेही की मांग

विधानसभा में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने कहा कि ऐसी घटनाएं प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

हालांकि सरकार की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश न देने की घटना की जांच के लिए कोई विशेष समिति गठित की गई है या नहीं।

सामाजिक और प्रशासनिक पहलू

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा के दौरान समयबद्धता जरूरी है, लेकिन असाधारण परिस्थितियों के लिए वैकल्पिक प्रावधानों पर विचार किया जा सकता है। इस घटना ने शिक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के समन्वय पर बहस छेड़ दी है।

कोमल की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक विफलता बताया है, जबकि सरकार की ओर से विस्तृत बयान का इंतजार है। फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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