RajyaSabhaElection – बिहार में राज्यसभा सीटों पर NDA में नई हलचल
RajyaSabhaElection – बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने अपनी मां रीना पासवान की संभावित दावेदारी को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है। उनके इस बयान के बाद राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के लिए राहत की स्थिति बनती दिख रही है, हालांकि अंतिम फैसला अब भी भारतीय जनता पार्टी के हाथ में है।

एनडीए में सीटों का गणित
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए पांच में से चार सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की जीत लगभग तय मानी जा रही है। इनमें दो सीटें जनता दल यूनाइटेड के खाते में जा सकती हैं, जबकि शेष दो पर फैसला भाजपा को करना है। राजनीतिक चर्चाओं में यह संभावना जताई जा रही है कि भाजपा अपने कोटे से एक वरिष्ठ नेता को राज्यसभा भेज सकती है और दूसरी सीट सहयोगी दल के लिए छोड़ सकती है।
उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदें
इन पांच सीटों में से एक सीट वर्तमान में उपेंद्र कुशवाहा के पास है। लोकसभा चुनाव में हार के बाद वे सहयोगी दलों के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। अब उनकी नजर दोबारा उसी सीट पर है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सीट बंटवारे को लेकर उनकी नाराजगी सामने आई थी, जिसके बाद शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत हुई थी। सूत्रों के अनुसार, उसी समय उन्हें भविष्य में राज्यसभा में अवसर देने का आश्वासन भी मिला था।
चिराग पासवान का बयान और असर
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की ओर से भी दावेदारी की चर्चा शुरू हुई थी। कुछ हलकों में यह अटकलें थीं कि रीना पासवान को राज्यसभा भेजा जा सकता है। लेकिन चिराग पासवान ने इन कयासों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया कि उनकी मां सक्रिय राजनीति में नहीं आ रहीं और उनकी ओर से कोई दावा नहीं है। इस बयान ने एनडीए के भीतर संभावित प्रतिस्पर्धा को फिलहाल शांत कर दिया है।
भाजपा के सामने विकल्प
अब नजर भाजपा के निर्णय पर टिकी है। पार्टी चाहे तो उपेंद्र कुशवाहा को दोबारा मौका दे सकती है या अपने संगठन के किसी नेता को प्राथमिकता दे सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण होगा, खासकर ऐसे समय में जब आगामी चुनावों की रणनीति भी आकार ले रही है।
पांचवीं सीट पर मुकाबले की संभावना
यदि विपक्ष अपनी ओर से उम्मीदवार नहीं उतारता है तो पांचों सीटों पर एनडीए की राह आसान हो सकती है। लेकिन अगर विपक्ष मैदान में उतरता है तो पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो जाएगा। एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। विपक्षी गठबंधन के पास फिलहाल उतने वोट नहीं हैं, इसलिए उन्हें अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा।
राजनीतिक समीकरणों के बीच क्रॉस वोटिंग की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में अंतिम नतीजे तक सस्पेंस बना रहना तय है। राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया और संभावित उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही तस्वीर साफ हो जाएगी। फिलहाल बिहार की सियासत में राज्यसभा की सीटें चर्चा के केंद्र में हैं और सभी दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं।



