बिहार

NEETCaseRow – छात्रा मौत मामले में नेताओं के तीखे बयान

NEETCaseRow – जहानाबाद की एक नीट अभ्यर्थी की संदिग्ध मौत को लेकर बिहार की राजनीति में तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज होता गया। हालात ऐसे बने कि नेताओं की भाषा व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गई।

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पटना के एक छात्रावास में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की मृत्यु के बाद शुरुआती स्तर पर इसे आत्महत्या माना जा रहा था। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ ऐसे संकेत सामने आए, जिनके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया। रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया गया और कुछ फोरेंसिक तथ्यों ने जांच एजेंसियों को नए सिरे से पड़ताल करने को प्रेरित किया। बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की सिफारिश की। 12 फरवरी से केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले की कमान संभाल ली है और विभिन्न स्थानों पर पूछताछ जारी है।

राजनीतिक बयानबाजी ने बढ़ाया तापमान

मामले को लेकर विपक्ष के कुछ नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने जांच की दिशा पर असंतोष जताते हुए प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनके बयानों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना तथ्यों के बयान देकर माहौल को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसी क्रम में दोनों नेताओं के बीच शब्दों का स्तर गिरता नजर आया। सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर कटाक्ष किए गए, जिनमें आपत्तिजनक उपमाओं का इस्तेमाल भी हुआ। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में संयमित भाषा अपेक्षित होती है, ताकि जांच प्रभावित न हो और पीड़ित परिवार को न्याय की प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।

जांच की दिशा और प्रशासनिक कदम

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। केंद्रीय एजेंसी द्वारा घटनास्थल, छात्रावास और संबंधित व्यक्तियों से जुड़े तथ्यों की विस्तृत जांच की जा रही है। मानवाधिकार आयोग ने भी मामले का संज्ञान लिया है और स्थानीय पुलिस से रिपोर्ट तलब की है।

इस बीच, सांसद पप्पू यादव एक पुराने मामले में गिरफ्तारी के बाद कुछ दिन न्यायिक हिरासत में रहे और हाल ही में रिहा हुए हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने इस प्रकरण में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि सरकार का पक्ष है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को भी जांच प्रक्रिया से ऊपर नहीं रखा जाएगा।

जनता की अपेक्षा: तथ्य और न्याय

छात्रा की मौत ने राज्य में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिजन और नागरिक समाज निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में राजनीतिक आरोपों से ज्यादा जरूरी है कि साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए।

फिलहाल जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने तक कई सवालों के जवाब बाकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि एजेंसियां तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने लाएंगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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