FakeIDRacket – रुद्रपुर में फर्जी जनसेवा केंद्र का भंडाफोड़
FakeIDRacket – उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक साल से संचालित हो रहे कथित जनसेवा केंद्र से बड़े स्तर पर दस्तावेजों की जालसाजी का मामला सामने आया है। विशेष कार्यबल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे केंद्र का खुलासा हुआ, जहां आधार कार्ड, पैन कार्ड और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में कथित तौर पर हेरफेर कर नए दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इस मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया गया है और भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है।

छापेमारी ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में स्थित एक दुकान पर की गई। पुलिस को सूचना मिली थी कि यहां बाहरी राज्यों से आए लोगों के पहचान पत्रों में बदलाव कर उन्हें स्थानीय निवासी दर्शाया जा रहा है। टीम के पहुंचते ही संचालक को हिरासत में ले लिया गया। प्रारंभिक पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह एक मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से दस्तावेजों में नाम और पता बदलकर प्रिंट निकालता था।
जनसेवा केंद्र की आड़ में कथित अवैध गतिविधि
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी बिना वैध अनुमति के जनसेवा केंद्र चला रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि सिडकुल की औद्योगिक इकाइयों में नौकरी दिलाने के नाम पर दस्तावेज तैयार किए जाते थे। चूंकि कई कंपनियां स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता देती हैं, इसलिए बाहरी राज्यों से आए कुछ लोग स्थानीय पते वाले पहचान पत्र बनवाने के लिए संपर्क करते थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र को सील कर दिया गया है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति या सहयोगी तो शामिल नहीं था।
भारी मात्रा में दस्तावेज और उपकरण बरामद
छापे के दौरान पुलिस को 42 आधार कार्ड, 55 पैन कार्ड, 9 हाईस्कूल अंकतालिकाएं जिनमें कुछ मूल और कुछ संदिग्ध बताए गए हैं, साथ ही कई फोटोशीट और नकदी मिली। इसके अलावा कंप्यूटर, प्रिंटर, मॉनिटर, बायोमैट्रिक स्कैनर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि मोबाइल फोन से भी कई संपादित दस्तावेजों की तस्वीरें प्राप्त हुई हैं। जब्त किए गए उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दस्तावेजों में किस प्रकार की तकनीकी हेरफेर की गई थी।
व्यापक जांच के संकेत
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में फर्जी दस्तावेज बनवाने या उनका उपयोग करने से बचें। ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई कठोर होती है और दोष सिद्ध होने पर गंभीर दंड का प्रावधान है।
पुलिस अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि पिछले एक वर्ष में कितने दस्तावेज तैयार किए गए और किन-किन लोगों ने उनका उपयोग किया। यदि अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
रुद्रपुर का यह मामला पहचान संबंधी दस्तावेजों की सुरक्षा और सत्यापन प्रणाली पर भी सवाल खड़ा करता है। जांच एजेंसियां तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।



