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VinayakChaturthi – 21 फरवरी को गणेश पूजन का शुभ समय और नियम

VinayakChaturthi – फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि पर मनाई जाने वाली विनायक चतुर्थी इस बार 21 फरवरी 2026 को पड़ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर बुद्धि, विवेक और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। हर महीने आने वाली यह चतुर्थी विशेष फलदायी मानी जाती है, खासकर जब श्रद्धा और नियमों का पालन किया जाए।

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चतुर्थी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि का आरंभ पूर्वाह्न में हो चुका था और इसका समापन 21 फरवरी को दोपहर लगभग 1 बजे के आसपास होगा। ऐसे में गणेश पूजन के लिए प्रातः 11 बजकर 27 मिनट से दोपहर 1 बजे तक का समय शुभ माना गया है। इस अवधि में पूजा, व्रत कथा और मंत्र जाप करना लाभकारी बताया गया है।

इस दिन चंद्र दर्शन का भी विशेष महत्व है। हालांकि रात्रि में एक निश्चित समय ऐसा होता है जिसे वर्जित काल कहा जाता है। लगभग रात 8 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 16 मिनट के बीच चंद्रमा को देखने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि वर्जित समय में चंद्र दर्शन शुभ नहीं माना जाता।

पूजा विधि और मंत्र जाप का महत्व

विनायक चतुर्थी पर प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप और धूप प्रज्वलित करें। मोदक या लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। पूजा के पश्चात संकटनाशक गणेश स्तोत्र या श्री गणेश स्तुति का पाठ किया जा सकता है।

मंत्र जाप में “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार उच्चारण विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ किया गया यह जाप मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देते समय पारंपरिक मंत्र का उच्चारण भी किया जाता है। इससे जीवन में आने वाली बाधाओं के निवारण की कामना की जाती है।

किन बातों का रखें ध्यान

इस दिन सात्विक आहार अपनाना चाहिए। प्याज, लहसुन और मांसाहार से परहेज करना धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप माना जाता है। मदिरा सेवन से भी बचना चाहिए।

घर की स्वच्छता और शांत वातावरण बनाए रखना इस दिन विशेष महत्व रखता है। विवाद या कटु वचन से दूर रहना भी आवश्यक है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिन भर संयम और सकारात्मक सोच बनाए रखें।

विनायक चतुर्थी आत्मचिंतन और अनुशासन का अवसर भी है। श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा व्यक्ति के मन में विश्वास और स्थिरता लाती है।

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