बिहार

SugarIndustry – फिर से चालू होंगी बिहार की बंद चीनी मिलें

SugarIndustry – बिहार में वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में सरकार ने ठोस कदम बढ़ाया है। दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी स्थित चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस पहल में राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ सहयोग करेगा। सोमवार को पटना स्थित दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारी प्रबंधन संस्थान में सहकारिता विभाग और संघ के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार मौजूद रहे।

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करार के साथ प्रक्रिया को मिली गति

समझौते पर सहकारिता विभाग की ओर से संयुक्त सचिव मो. अब्दुल रब खां और संघ की ओर से प्रबंध निदेशक प्रकाश नाईकनवारे ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर मंत्री ने कहा कि राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए अगले पांच वर्षों में कई पहल की जाएंगी। उनका कहना था कि चीनी मिलों के दोबारा चालू होने से न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि गन्ना उत्पादक किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा।

किसानों के लिए सहकारी मॉडल

सरकार की योजना है कि गन्ना उगाने वाले किसानों की सहकारी समितियां गठित की जाएं। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए स्थायी बाजार उपलब्ध हो सकेगा। मंत्री ने कहा कि सहकारी ढांचे के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि संभव है और उन्हें बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। गन्ना आधारित उद्योगों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कमांड एरिया तय, उत्पादन बढ़ाने की तैयारी

ईख आयुक्त अनिल झा ने बताया कि फिलहाल राज्य में 10 चीनी मिलें संचालित हैं, जबकि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह संख्या काफी अधिक है। रैयाम और सकरी मिलों के लिए 2401 गांवों को कमांड एरिया के रूप में चिह्नित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि गन्ना की खेती अन्य कई फसलों की तुलना में किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। यदि मिलें नियमित रूप से चलती हैं तो उत्पादन और विपणन की प्रक्रिया व्यवस्थित होगी।

जल्द तैयार होगी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट

राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ की टीम दोनों स्थानों पर नई सहकारी मिलों की स्थापना के लिए संभाव्यता अध्ययन और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करेगी। करार के तुरंत बाद विशेषज्ञों की टीम दरभंगा और मधुबनी के लिए रवाना हो गई। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही तय की जाएगी।

इथेनॉल और ऊर्जा उत्पादन पर भी जोर

संघ के प्रबंध निदेशक ने कहा कि एक समय देश के कुल चीनी उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी उल्लेखनीय थी। उन्होंने विश्वास जताया कि योजनाबद्ध प्रयासों से राज्य फिर से अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। प्रस्तावित परियोजना में केवल चीनी उत्पादन ही नहीं, बल्कि इथेनॉल, बिजली उत्पादन और कम्प्रेस्ड बायो गैस के निर्माण की भी योजना है। इससे मिलें बहुआयामी औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित हो सकेंगी।

भूमि हस्तांतरण और प्रशासनिक उपस्थिति

सकरी मिल परिसर में लगभग 30 एकड़ और रैयाम में करीब 68 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिसे सहकारिता विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। कार्यक्रम में विभागीय सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निबंधक सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।

सरकार का मानना है कि बंद मिलों को पुनर्जीवित करने से न केवल कृषि आधारित उद्योगों को नया आधार मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। अब सभी की निगाहें इस परियोजना की प्रगति पर टिकी हैं।

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