उत्तराखण्ड

SecurityPolicy – मारपीट प्रकरण के बाद सरकारी दफ्तरों में लागू हुई सख्त सुरक्षा व्यवस्था

SecurityPolicy – बेसिक शिक्षा निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद राज्य सरकार ने सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। बुधवार देर रात मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन की ओर से नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई, जिसे निदेशालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा कार्यालयों में अनुशासन बनाए रखना है।

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दफ्तरों में मुलाकात की नई व्यवस्था

नई एसओपी के तहत अधिकारियों से मिलने के नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं। अब किसी भी अधिकारी से मिलने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। एक बार में केवल दो लोग ही किसी अधिकारी से मुलाकात कर सकेंगे। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मामले में अधिकतम तीन लोगों को मिलने की अनुमति होगी। यदि किसी समूह की संख्या अधिक है, तो मुलाकात अधिकारी कक्ष के बजाय सभा कक्ष या कॉन्फ्रेंस हॉल में कराई जाएगी, जहां सीसीटीवी कैमरे लगे होंगे।

सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक भीड़ और संभावित विवाद की स्थिति को रोका जा सकेगा। साथ ही कार्यालय परिसर में नारेबाजी, शोर-शराबा या किसी भी प्रकार का उत्तेजक व्यवहार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

सुरक्षाकर्मियों और वीआईपी के लिए भी नियम

एसओपी का दायरा आम नागरिकों से लेकर जनप्रतिनिधियों, उनके समर्थकों, निजी सुरक्षाकर्मियों और ठेकेदारों तक विस्तृत किया गया है। अब कोई भी वीआईपी अधिकारी से मिलने के दौरान अपने सुरक्षाकर्मी को साथ लेकर अंदर नहीं जा सकेगा। सुरक्षाकर्मी को अपने हथियार की जानकारी रिसेप्शन पर दर्ज करानी होगी और उसे प्रतीक्षा कक्ष में ही रुकना होगा।

इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यालय परिसर में हथियारों का अनियंत्रित प्रवेश न हो और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना कम की जा सके।

साइलेंट पैनिक अलार्म और सीसीटीवी निगरानी

नई व्यवस्था के तहत अधिकारियों की मेज के नीचे और रिसेप्शन क्षेत्र में साइलेंट पैनिक अलार्म लगाए जाएंगे। आपात स्थिति में इनका उपयोग कर तुरंत सहायता प्राप्त की जा सकेगी। इसके अलावा कार्यालयों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज लोकल सर्वर पर कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखी जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विवाद या घटना की स्थिति में फुटेज अहम साक्ष्य के रूप में काम करेगी। इससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित होने की उम्मीद है।

दुर्व्यवहार पर तत्काल कानूनी कार्रवाई

यदि किसी सरकारी दफ्तर में दुर्व्यवहार या हिंसा की घटना होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। घटना स्थल को आवश्यक होने पर सील किया जाएगा ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो। ऐसे मामलों की जांच इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी द्वारा की जाएगी और दो महीने के भीतर जांच पूरी करना अनिवार्य होगा।

इस कदम को कर्मचारियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

विधायक की माफी के बाद हड़ताल स्थगित

रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ ने मीडिया के सामने आकर 21 फरवरी को शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल के साथ हुई मारपीट की घटना पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिक चिंता विद्यार्थियों की पढ़ाई है और विवाद के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

विधायक की माफी और सुरक्षा संबंधी एसओपी जारी होने के बाद तीन दिनों से जारी कर्मचारियों की हड़ताल स्थगित कर दी गई।

शिक्षकों का समर्थन और राजनीतिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर चले गए थे। बुधवार को शिक्षक संगठनों ने भी आंदोलन में शामिल होकर समर्थन दिया। कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत भी धरना स्थल पर पहुंचे और कर्मचारियों के पक्ष में अपनी बात रखी। इससे मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

भविष्य की कार्रवाई को लेकर चेतावनी

कर्मचारियों की कोर कमेटी ने शाम को बैठक कर निर्णय लिया कि यदि इस मामले में उनके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई की गई तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। कमेटी ने बताया कि विधायक की ओर से दर्ज मुकदमे वापस लेने का आश्वासन दिया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर दबाव या कार्रवाई की कोशिश हुई तो बिना पूर्व सूचना के फिर से विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।

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