LunarEclipse – 3 मार्च को दिखेगा वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण
LunarEclipse – 3 मार्च को इस वर्ष का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जो भारत सहित कई देशों में दिखाई देगा। खास बात यह है कि जैसे ही भारत में चंद्रमा उदित होगा, वह ग्रहणग्रस्त अवस्था में नजर आएगा। खगोल विज्ञान के लिहाज से यह एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में पड़ रहा है, जिसका प्रभाव विशेष रूप से सिंह राशि के जातकों पर बताया जा रहा है।

ग्रहण का समय और अवधि
उपलब्ध जानकारी के अनुसार चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से आरंभ होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इसी समय मोक्ष भी माना जाएगा। सूतक काल ग्रहण शुरू होने से लगभग नौ घंटे पहले प्रभावी हो जाता है। भारत में यह ग्रहण उदय के समय दिखाई देगा, इसलिए यहां इसकी दृश्य अवधि सीमित रहेगी। कई स्थानों पर यह लगभग 20 मिनट तक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।
किन-किन क्षेत्रों में दिखेगा ग्रहण
यह खगोलीय घटना एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, उत्तर और दक्षिण अमेरिका तथा रूस में देखी जा सकेगी। भारत के अलावा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भी पूर्ण चंद्र ग्रहण का दृश्य उपलब्ध रहेगा। अलग-अलग देशों में स्थानीय समय के अनुसार इसकी अवधि में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन भारतीय समयानुसार यह दोपहर से शाम के बीच रहेगा।
सूतक काल में क्या रखें सावधानी
धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना नहीं की जाती। लोग घरों में ही ईश्वर का स्मरण और मंत्र जाप करते हैं। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। साथ ही जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, उन्हें संयम रखने की परंपरागत सलाह दी जाती है। वृद्ध और बीमार व्यक्तियों को छोड़कर कई लोग इस समय भोजन से परहेज भी करते हैं।
होली और ग्रहण एक ही दिन
इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होली और चंद्र ग्रहण एक साथ पड़ रहे हैं। सूतक काल प्रभावी रहने के कारण कई स्थानों पर जल से होली खेलने से बचने की परंपरा निभाई जाती है। मान्यता है कि चंद्रमा जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए ग्रहण के दौरान जल से जुड़े कार्य सीमित रखे जाते हैं। हालांकि यह आस्था पर आधारित परंपराएं हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में अलग ढंग से पालन की जाती हैं।
मंदिरों के कपाट रहेंगे बंद
कई मंदिरों में सूतक काल शुरू होने के साथ ही कपाट बंद कर दिए जाते हैं। कुछ स्थानों पर सुबह आरती के बाद मंदिर बंद कर दिए जाएंगे और ग्रहण समाप्ति के पश्चात शाम को दोबारा खोले जाएंगे। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि ग्रहण के दौरान घर पर ही पूजा-पाठ करें और भीड़ से बचें। ग्रहण समाप्ति के बाद मंदिरों में शुद्धिकरण की प्रक्रिया के उपरांत नियमित दर्शन प्रारंभ होंगे।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण
खगोलशास्त्रियों के अनुसार पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षित तरीके से इसे देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखने में कोई हानि नहीं होती।
डिस्क्लेमर: ग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं। विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।



