PanchayatElection – बिहार में पंचायत चुनाव दलीय आधार पर कराने की मांग
PanchayatElection – बिहार में इस वर्ष प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान यह मुद्दा सामने आया, जब सत्तारूढ़ दल के एक विधायक ने चुनाव दलीय आधार पर कराने की मांग रखी। फिलहाल राज्य में पंचायत चुनाव गैर-दलीय प्रणाली से कराए जाते हैं, लेकिन इस बार इसे बदलने की मांग ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

सदन में उठा मुद्दा, सरकार से की गई मांग
पूर्णिया जिले के बनमनखी से विधायक कृष्ण कुमार ऋषि ने गैर सरकारी संकल्प प्रस्ताव के माध्यम से यह विषय सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को राजनीतिक दलों के चुनाव चिह्न पर कराया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि जब अन्य राज्यों में जिला परिषद और मुखिया जैसे पदों के लिए दलीय आधार पर चुनाव संभव हैं, तो बिहार में भी इस पर विचार किया जा सकता है।
विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि आगामी चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर इस विषय पर व्यापक चर्चा की जाए। उनका कहना था कि अभी चुनाव में लगभग छह महीने का समय है, इसलिए नीति स्तर पर बदलाव के लिए पर्याप्त अवसर मौजूद है।
मंत्री ने दिया संतुलित जवाब
पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने सदन में स्पष्ट किया कि फिलहाल पंचायत चुनाव बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 और बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली के तहत गैर-दलीय आधार पर ही कराए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस समय सरकार के पास दलीय आधार पर चुनाव कराने का कोई औपचारिक प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
हालांकि, मंत्री ने यह भी जोड़ा कि यह एक ऐसा विषय है जिस पर व्यापक सहमति जरूरी है। यदि सभी संबंधित पक्ष, राजनीतिक दल और आम जनता इस बदलाव के पक्ष में हों, तो सरकार इस पर विचार कर सकती है। उनके इस बयान को संभावनाओं के द्वार खुले रखने के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान व्यवस्था क्या है
बिहार में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव अभी गैर-दलीय आधार पर होते हैं। मुखिया, सरपंच और वार्ड सदस्य जैसे पदों के लिए उम्मीदवार किसी राजनीतिक दल के आधिकारिक चुनाव चिह्न पर चुनाव नहीं लड़ते। मतपत्र या ईवीएम पर उनके नाम के साथ किसी पार्टी का प्रतीक नहीं होता।
हालांकि व्यवहारिक तौर पर कई राजनीतिक दल अपने समर्थित उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं। प्रचार के दौरान राजनीतिक समर्थन दिखाई देता है, लेकिन आधिकारिक रूप से उम्मीदवार स्वतंत्र ही माने जाते हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर व्यक्तिगत नेतृत्व को बढ़ावा देना बताया जाता है।
चुनाव का संभावित कार्यक्रम
राज्य में पंचायत चुनाव नवंबर 2026 में होने की संभावना है। पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होगा। राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही संकेत दे चुका है कि चुनाव निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे। पंचायती राज मंत्री भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि चुनाव समयसीमा के भीतर संपन्न कराए जाएंगे।
ऐसे में दलीय आधार पर चुनाव कराने की मांग को लेकर आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। फिलहाल सरकार की ओर से किसी ठोस निर्णय का संकेत नहीं है, लेकिन सदन में उठी इस चर्चा ने पंचायत चुनाव की दिशा और स्वरूप पर नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अब देखना होगा कि यह मुद्दा आगे बढ़ता है या मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहती है। फिलहाल राजनीतिक दलों और सरकार के बीच इस विषय पर संवाद की संभावना बनी हुई है।



