बिहार

AntiConversionLaw – बिहार में धर्मांतरण पर कानून बनाने की चर्चा तेज

AntiConversionLaw – बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान धर्मांतरण के मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई। सदन में उठे एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने राज्य सरकार को इस विषय की समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि यदि विभिन्न क्षेत्रों से आ रही शिकायतें गंभीर पाई जाती हैं, तो सरकार आवश्यक कानूनी कदम उठाने पर विचार करे। इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर से अलग-अलग मत सामने आए।

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विधायक ने उठाया मुद्दा

भाजपा विधायक बीरेंद्र कुमार ने सदन में कहा कि राज्य के कुछ हिस्सों में धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले सामने आ रहे हैं। उनका आरोप था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को बेहतर जीवन का भरोसा देकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ मामलों में विवाह को माध्यम बनाया जाता है। विधायक ने इन आरोपों के आधार पर सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग की।

उन्होंने सदन में जनसंख्या के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ समुदायों की वृद्धि दर में असामान्य बढ़ोतरी देखी जा रही है। साथ ही, उन्होंने राज्य में चर्चों की बढ़ती संख्या का भी उल्लेख किया। हालांकि इन दावों पर सरकार की ओर से विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई।

सरकार का जवाब

मामले पर सरकार की ओर से मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था के मामलों को गंभीरता से लेती है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की जांच की जाती है। फिलहाल धर्मांतरण को लेकर कोई अलग विधेयक सरकार के विचाराधीन नहीं है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय से पहले व्यापक समीक्षा और कानूनी पहलुओं का परीक्षण जरूरी होगा।

विधानसभा अध्यक्ष ने चर्चा के बाद कहा कि यदि विभिन्न इलाकों से आ रही शिकायतों में तथ्य मिलते हैं, तो सरकार इस पर समुचित कार्रवाई करे। उन्होंने इसे संवेदनशील विषय बताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।

अन्य राज्यों का हवाला

चर्चा के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में धर्मांतरण के खिलाफ विशेष कानून लागू हैं। विधायक ने सुझाव दिया कि बिहार भी इन राज्यों की तरह स्पष्ट कानूनी प्रावधान लागू कर सकता है। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर ही लिया जाएगा।

बजट सत्र का समापन

इसी दिन बिहार विधानमंडल का बजट सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। 2 फरवरी से शुरू हुए सत्र के दौरान राज्य सरकार ने 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया। 19 दिनों तक चले इस सत्र में कुल 12 विधेयक पारित किए गए। इनमें बिहार तकनीकी सेवा आयोग संशोधन विधेयक, बिहार कर्मचारी चयन आयोग संशोधन विधेयक, बिहार नगर पालिका संशोधन विधेयक और बिहार सिविल न्यायालय विधेयक सहित अन्य अहम प्रस्ताव शामिल रहे।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार और विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने-अपने सदनों की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा की। सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें प्रशासनिक सुधार, नियुक्तियां और स्थानीय निकायों से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

आगे क्या

धर्मांतरण से जुड़े कानून को लेकर फिलहाल कोई औपचारिक विधेयक पेश नहीं किया गया है। सरकार ने संकेत दिया है कि किसी भी निर्णय से पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श आवश्यक होगा। आने वाले समय में यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस विषय पर कोई ठोस कदम उठाती है या मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत ही मामलों को निपटाया जाएगा।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है, लेकिन किसी नए कानून की दिशा में अभी स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।

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