IndonesiaTruckDeal – भारत से 1.05 लाख ट्रकों की खरीद पर लगी रोक, जानें सारे आँकड़े…
IndonesiaTruckDeal – इंडोनेशिया सरकार ने भारत की दो प्रमुख वाहन कंपनियों टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा से प्रस्तावित बड़े ट्रक ऑर्डर को फिलहाल रोक दिया है। यह फैसला स्थानीय उद्योग संगठनों और नीति निर्माताओं के विरोध के बाद लिया गया। प्रस्तावित सौदे के तहत इंडोनेशिया को भारतीय कंपनियों से कुल 1,05,000 ट्रक खरीदने थे।

किस कंपनी को क्या मिलना था ऑर्डर
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सौदा दोनों भारतीय कंपनियों के लिए अब तक के सबसे बड़े निर्यात समझौतों में से एक माना जा रहा था।
महिंद्रा एंड महिंद्रा को इस वर्ष 35,000 स्कॉर्पियो पिक-अप वाहनों की आपूर्ति करनी थी। कंपनी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर हो सकता था।
वहीं टाटा मोटर्स की स्थानीय इकाई को 35,000 योद्धा पिक-अप और 35,000 अल्ट्रा टी.7 ट्रकों की सप्लाई करनी थी। इंडोनेशियाई बाजार के लिए यह टाटा का सबसे बड़ा ऑर्डर माना जा रहा था।
हालांकि इस निर्णय पर दोनों कंपनियों की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इन ट्रकों की जरूरत क्यों पड़ी
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने देशभर में 80,000 से अधिक सामुदायिक सहकारी समितियां स्थापित करने की योजना बनाई है। इन समितियों के माध्यम से ग्रामीण इलाकों तक जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के तहत 4×4 और 6 पहिया ट्रकों का उपयोग कोल्ड स्टोरेज, सब्सिडी वाली खाद और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाने के लिए किया जाना था। इसके अलावा ये समितियां ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण सेवाएं भी उपलब्ध कराएंगी, जिससे प्रशासनिक ढांचे को सरल बनाकर सीधे लोगों तक पहुंच बनाई जा सके।
स्थानीय उद्योग का विरोध
जकार्ता में इस बड़े आयात के खिलाफ आवाज उठाई गई। इंडोनेशिया दक्षिण पूर्व एशिया की बड़ी अर्थव्यवस्था है और वहां टोयोटा, सुजुकी तथा मित्सुबिशी जैसी कंपनियों की उत्पादन इकाइयां पहले से मौजूद हैं।
बीते वर्ष घरेलू मांग में गिरावट और सख्त कर्ज नीति के कारण वाहन बिक्री में लगभग 7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। ऐसे में स्थानीय उद्योग संगठनों का तर्क है कि बड़े पैमाने पर आयात घरेलू विनिर्माण और रोजगार सृजन के प्रयासों के विपरीत होगा।
उद्योग मंत्री अगुस गुमीवांग कर्तासस्मिता ने कहा कि देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में सालाना करीब 10 लाख पिक-अप ट्रक बनाने की क्षमता है। उनका अनुमान है कि यदि 70,000 पिक-अप ट्रकों का उत्पादन देश में ही होता, तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को लगभग 27 ट्रिलियन रुपिया का लाभ मिल सकता था और हजारों रोजगार सृजित होते।
आगे क्या होगा
सहकारिता मंत्री फेरी जूलियांटोनो ने बताया कि संसद और सरकार के बीच चर्चा पूरी होने तक इस सौदे को अस्थायी रूप से स्थगित रखा गया है। उन्होंने इसे संभावित विवाद से बचने के लिए उठाया गया कदम बताया।
संसद के उपाध्यक्ष सुफमी दास्को अहमद ने भी राष्ट्रपति की विदेश यात्रा से वापसी तक आयात प्रक्रिया रोकने की मांग की थी। यह खरीद पीटी एग्रिनास पंगन नुसंतारा नामक सरकारी कंपनी के जरिए की जानी थी, जिसे खाद्य आत्मनिर्भरता और कृषि परियोजनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाल में स्थापित किया गया है।
अब यह देखना अहम होगा कि सरकार घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देती है या संशोधित शर्तों के साथ आयात समझौते को आगे बढ़ाया जाता है।



