ElectionCommission – बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था तेज
ElectionCommission – पश्चिम बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे तेज होने लगी हैं। इसी सिलसिले में चुनाव आयोग ने राज्य की स्थिति का आकलन करने और चुनावी प्रबंधन की समीक्षा के लिए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। आयोग की 13 सदस्यीय पूर्ण पीठ 8 मार्च से कोलकाता के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचेगी। इस दौरे के दौरान चुनावी व्यवस्थाओं, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। साथ ही विभिन्न एजेंसियों को पहले से ही सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।

चुनावी तैयारियों का जायजा लेने को आयोग का दौरा
सूत्रों के अनुसार, आयोग का यह दौरा चुनावी तैयारियों की जमीनी स्थिति समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आने वाला यह प्रतिनिधिमंडल 8 से 10 मार्च तक कोलकाता में रहेगा। इस दौरान आयोग के सदस्य राज्य प्रशासन, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ कई बैठकों में हिस्सा लेंगे।
दौरे का प्रमुख उद्देश्य राज्य में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का आकलन करना है। आयोग यह भी देखेगा कि संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र किस तरह काम कर रहा है।
अवैध धन और सामग्री की निगरानी के निर्देश
चुनाव आयोग ने प्रवर्तन एजेंसियों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि चुनावी माहौल में अवैध धन या सामग्री के प्रवाह को रोकने के लिए अभी से सक्रिय निगरानी शुरू की जाए। इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और राज्य जीएसटी जैसे विभागों को राज्य के विभिन्न इलाकों में नियमित जांच अभियान चलाने के लिए कहा गया है।
जानकारी के मुताबिक, एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर नाका जांच को मजबूत किया जाए। इसके अलावा जब्ती और तलाशी से जुड़ी हर कार्रवाई की जानकारी नियमित रूप से चुनाव आयोग को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरे राज्य में गतिविधियों की निगरानी बनी रहे।
संवेदनशील जिलों में न्यायिक अधिकारियों की तैनाती
चुनावी विवादों के त्वरित निपटारे के लिए आयोग ने एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड से लगभग 200 नए न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल में तैनात करने का फैसला किया गया है।
इन अधिकारियों को राज्य के आठ संवेदनशील जिलों में जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इनमें उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली, हावड़ा, बीरभूम, पूर्व बर्धमान, पश्चिम बर्धमान और नादिया शामिल हैं। इन जिलों में चुनाव के दौरान उत्पन्न होने वाले कानूनी विवादों और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया तेज करने की योजना बनाई गई है।
लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया
एक रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बड़ी संख्या में मामलों को निपटाने के लिए न्यायिक अधिकारियों को भेजा गया था। कुल मिलाकर लगभग 61 लाख मामलों को प्रक्रिया के लिए भेजा गया था। अब तक इनमें से करीब 6.5 लाख मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इनमें से कितने मामलों को खारिज किया गया है और कितनों में आगे की कार्रवाई जारी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया लगातार जारी है और शेष मामलों पर भी काम किया जा रहा है।
सर्वदलीय बैठक में होगी चुनावी मुद्दों पर चर्चा
कोलकाता दौरे के दौरान 9 मार्च को एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक भी आयोजित की जाएगी। सुबह 10 बजे से शुरू होने वाली इस बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। करीब दो घंटे चलने वाली इस बैठक में चुनाव से जुड़ी व्यवस्थाओं, शिकायतों और सुझावों पर चर्चा होने की संभावना है।
इस बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे आयोग को विभिन्न राजनीतिक दलों की चिंताओं और अपेक्षाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक
10 मार्च को आयोग की टीम राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक करेगी। इस बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को शामिल किया जाएगा।
बैठक में कानून-व्यवस्था की स्थिति, बूथ स्तर की तैयारियां और चुनाव से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर चर्चा होगी। इसके अलावा बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका और जमीनी स्तर पर मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी।
चुनाव आयोग की यह सक्रियता संकेत देती है कि आगामी चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए तैयारियां अभी से तेज कर दी गई हैं।



