बिहार

Investment – बिहार में बिजली क्षेत्र के विस्तार के लिए 78 हजार करोड़ निवेश की तैयारी

Investment – बिहार सरकार आने वाले वर्षों में बिजली क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की तैयारी कर रही है। राज्य में उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अगले पांच वर्षों में करीब 78 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है। इस दिशा में संभावित निवेश और सहयोग के अवसरों को लेकर ऊर्जा विभाग और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

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ऊर्जा विभाग और उद्योग संगठनों के बीच हुई बैठक

राजधानी पटना स्थित विद्युत भवन में ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। इस बैठक में बिजली क्षेत्र के विकास की दीर्घकालिक रणनीति, नई परियोजनाओं की संभावनाओं और निवेश के अवसरों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार भी मौजूद रहे। वहीं उद्योग जगत की ओर से ज्योति मुकुल, सुरेंद्र राय और संजय गोयनका सहित विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटरिंग, ट्रांसफार्मर निर्माण और वित्तीय सेवाओं से जुड़े कुल 17 प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इस चर्चा में भाग लिया।

बिजली उत्पादन और वितरण में बड़े निवेश की योजना

ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह ने बैठक के दौरान बताया कि बिहार सरकार वर्ष 2026 से 2031 के बीच बिजली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बना रही है। इस निवेश का उद्देश्य बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाना, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और वितरण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।

उन्होंने कहा कि राज्य में बिजली ढांचे के विकास से उद्योगों को बेहतर ऊर्जा उपलब्ध होगी और इससे औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में बिहार तेजी से एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में उभर सकता है।

आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर

ऊर्जा विभाग बिजली व्यवस्था को अधिक दक्ष बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी ध्यान दे रहा है। अधिकारियों के अनुसार, भविष्य में ड्रोन आधारित निगरानी और एआई आधारित प्रणालियों का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है।

इन तकनीकों के जरिए बिजली नेटवर्क की निगरानी आसान होगी, खराबी का पता जल्दी चलेगा और परिचालन की लागत को कम किया जा सकेगा। विभाग का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत कम टैरिफ पर बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

निवेशकों को सहयोग का भरोसा

बैठक के दौरान ऊर्जा सचिव ने उद्योग प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया कि बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियां निवेशकों के साथ समन्वय बनाकर काम करेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बिजली क्षेत्र में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर लगातार काम कर रही है।

सरकार की नीतियों के कारण निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बिजली क्षेत्र में नई परियोजनाओं के लिए सकारात्मक माहौल बन रहा है।

बिजली क्षेत्र की प्रगति के आंकड़े

बैठक में बिजली कंपनियों की प्रगति से जुड़े आंकड़े भी साझा किए गए। अधिकारियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2020 में जहां बिजली कंपनी का राजस्व संग्रह 8,598 करोड़ रुपये था, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 17,115 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

इसके साथ ही एटीएंडसी हानि में भी उल्लेखनीय कमी आई है। पहले यह हानि 35.12 प्रतिशत थी, जो अब घटकर लगभग 15.54 प्रतिशत रह गई है। पिछले दस वर्षों में बिजली क्षेत्र में करीब 75 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है।

बढ़ती बिजली मांग और उपभोक्ताओं की संख्या

राज्य में बिजली की मांग भी लगातार बढ़ रही है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2013 में जहां पीक ऑवर के दौरान बिजली की मांग 1,802 मेगावाट थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 8,752 मेगावाट तक पहुंच गई है।

ऊर्जा विभाग के मुताबिक बिहार में अब 220 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान की जा रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ व्यापक विद्युतीकरण भी किया गया है।

बैठक के दौरान यह भी कहा गया कि राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार में मजबूत, आधुनिक और निवेशकों के लिए अनुकूल बिजली तंत्र विकसित करना है। यह पहल राज्य को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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