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IndiaChinaRelations – इस देश ने की भारत को साझेदार मानने और सहयोग बढ़ाने की अपील

IndiaChinaRelations – चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को बीजिंग में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में भारत और चीन के संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखने के बजाय सहयोगी और अवसर के रूप में देखना चाहिए। वांग यी का मानना है कि एशिया की स्थिरता और विकास के लिए भारत और चीन के बीच भरोसे और सहयोग का माहौल मजबूत होना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को अपने शीर्ष नेतृत्व द्वारा तय दिशा का पालन करते हुए संबंधों को आगे बढ़ाना चाहिए।

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नेताओं की मुलाकातों से रिश्तों में आई नई शुरुआत

वांग यी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई हालिया बैठकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वार्ताओं से दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष अगस्त में तियानजिन में हुई मुलाकात और उससे पहले 2024 में कजान में हुई बैठक ने संबंधों को नई गति दी है।

उनके अनुसार इन बैठकों के बाद विभिन्न स्तरों पर संवाद फिर से सक्रिय हुआ है। द्विपक्षीय व्यापार में भी नई ऊंचाइयाँ देखने को मिली हैं और लोगों के बीच संपर्क बढ़ा है। वांग यी ने कहा कि इन प्रयासों से दोनों देशों की जनता को व्यावहारिक लाभ मिलने लगे हैं।

भविष्य के रिश्तों को लेकर चीन का दृष्टिकोण

चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और चीन को दीर्घकालिक रणनीतिक दृष्टि अपनाने की जरूरत है। उनका कहना था कि अगर दोनों देश एक-दूसरे को अवसर के रूप में देखते हैं तो सहयोग के कई नए रास्ते खुल सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी की तरह संबंध बनाए रखने चाहिए और सीमावर्ती इलाकों में शांति तथा स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उनके अनुसार क्षेत्रीय शांति बनाए रखना दोनों देशों के विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

ग्लोबल साउथ के संदर्भ में साझा हित

वांग यी ने अपने वक्तव्य में ‘ग्लोबल साउथ’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों ऐसे देशों में शामिल हैं जिन्हें वैश्विक दक्षिण का हिस्सा माना जाता है और जिनके सामने विकास से जुड़े कई समान अवसर और चुनौतियाँ हैं।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध भी गहरे हैं। इसी कारण अनेक वैश्विक मुद्दों पर उनके हित भी समान हो सकते हैं। वांग का मानना है कि इन साझा हितों को ध्यान में रखते हुए सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए।

बाहरी हस्तक्षेप से दूर रहने की सलाह

चीन के विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि आपसी विश्वास और सहयोग दोनों देशों के विकास के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि विभाजन या टकराव की स्थिति एशिया के उभार के लिए अनुकूल नहीं होगी।

हालांकि उन्होंने किसी देश या परिस्थिति का नाम लिए बिना कहा कि भारत और चीन को अपने संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में बाहरी हस्तक्षेप से दूर रहना चाहिए। उनके अनुसार दोनों देशों को अपने नेताओं द्वारा तय किए गए मार्ग पर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

ब्रिक्स मंच पर सहयोग की उम्मीद

वांग यी ने ब्रिक्स समूह के संदर्भ में भी भारत और चीन के बीच सहयोग की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को इस मंच पर एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए।

भारत इस वर्ष ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है, जबकि 2027 में इस आयोजन की जिम्मेदारी चीन के पास होगी। ऐसे में वांग यी का कहना है कि इस मंच के जरिए उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी भूमिका मजबूत कर सकती हैं।

ब्रिक्स समूह का बढ़ता दायरा

ब्रिक्स समूह शुरुआत में पांच देशों—ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका—का मंच था। बाद के वर्षों में इसके दायरे का विस्तार किया गया और कई नए देशों को इसमें शामिल किया गया।

अब इस समूह में सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान भी शामिल हो चुके हैं। इस विस्तार के बाद ब्रिक्स को वैश्विक मंच पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक बड़े समूह के रूप में देखा जा रहा है।

सीमा विवाद के बाद धीरे-धीरे सामान्य हो रहे रिश्ते

पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध के कारण पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के संबंधों में तनाव देखने को मिला था। लगभग पांच वर्षों तक दोनों देशों के बीच रिश्तों में ठंडापन बना रहा।

हालांकि हाल के समय में शीर्ष स्तर की बैठकों और कूटनीतिक बातचीत के बाद संबंधों को सामान्य बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई है। दोनों देशों ने कुछ व्यावहारिक कदम भी उठाए हैं, जिनमें वीजा सेवाओं और हवाई उड़ानों को फिर से शुरू करने जैसे प्रयास शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संवाद की यह प्रक्रिया जारी रहती है तो आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर बन सकते हैं।

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