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RajyaSabhaElection – कई राज्यों से नेता निर्विरोध चुने गए, सिंघवी भी हुए शामिल

RajyaSabhaElection – देश के कई राज्यों से सोमवार को राज्यसभा के लिए कई नेताओं को बिना किसी मुकाबले के निर्वाचित घोषित कर दिया गया। इनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, तृणमूल कांग्रेस के नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री बाबुल सुप्रियो सहित विभिन्न दलों के कई प्रमुख नाम शामिल हैं। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि इन सीटों पर किसी प्रकार का मतदान आवश्यक नहीं रहा, क्योंकि निर्धारित सीटों के बराबर ही उम्मीदवार मैदान में थे।

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तेलंगाना में कांग्रेस उम्मीदवारों को मिला निर्विरोध समर्थन

तेलंगाना से कांग्रेस के दो उम्मीदवारों को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुना गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी और वी. नरेंद्र रेड्डी को बिना मतदान के ही विजयी घोषित कर दिया गया। राज्य में अन्य किसी उम्मीदवार द्वारा चुनौती नहीं दिए जाने के कारण निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों को निर्वाचित माना गया।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विधानसभा में संख्या बल के आधार पर कांग्रेस की स्थिति मजबूत होने के कारण इस परिणाम की पहले से ही संभावना जताई जा रही थी। इसी कारण राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की नौबत नहीं आई।

पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस के चार उम्मीदवार निर्विरोध

पश्चिम बंगाल से भी कई उम्मीदवारों को बिना मुकाबले के राज्यसभा के लिए चुना गया। तृणमूल कांग्रेस की ओर से बाबुल सुप्रियो, मेनका गुरुस्वामी, पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और अभिनेत्री कोयल मलिक को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी राज्यसभा के लिए बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के चुने गए। विधानसभा में दलों की संख्या के अनुसार इन उम्मीदवारों के लिए जीत का रास्ता पहले से ही लगभग तय माना जा रहा था।

तमिलनाडु से भी कई दलों के उम्मीदवार चुने गए

तमिलनाडु में भी राज्यसभा की सीटों के लिए कई उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। द्रविड़ मुनेत्र कषगम के तिरुचि शिवा और जे. कॉन्स्टेंटाइन रविंद्रन को उच्च सदन के लिए निर्वाचित घोषित किया गया।

इसके अलावा अन्ना द्रमुक के वरिष्ठ नेता एम. थंबी दुरई, पीएमके के अंबुमणि रामदास, कांग्रेस के क्रिस्टोफर मणिकम और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कषगम के एल.के. सुधीश भी बिना मुकाबले के राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। राज्य में विधानसभा की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इन परिणामों को लगभग तय माना जा रहा था।

अन्य राज्यों से भी निर्विरोध निर्वाचन

छत्तीसगढ़ से भी दो उम्मीदवारों को निर्विरोध चुना गया। भारतीय जनता पार्टी की नेता लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम को बिना मतदान के ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया।

वहीं हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस नेता अनुराग शर्मा भी बिना किसी प्रतिद्वंद्वी के राज्यसभा सदस्य चुने गए। संबंधित राज्यों के निर्वाचन अधिकारियों ने औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित किया।

नामांकन प्रक्रिया के बाद स्पष्ट हुआ परिणाम

राज्यसभा चुनाव के लिए 5 मार्च को दस राज्यों की 37 सीटों पर उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे। इन सीटों के लिए कुल 39 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें कुछ निर्दलीय प्रत्याशी भी शामिल थे।

हालांकि कई राज्यों में सीटों की संख्या और उम्मीदवारों की संख्या लगभग समान रहने के कारण चुनावी मुकाबले की स्थिति नहीं बनी। इसके चलते कई उम्मीदवारों को बिना मतदान के ही निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

पश्चिम बंगाल में पांच सीटों पर होना था चुनाव

पश्चिम बंगाल में इस वर्ष राज्यसभा की कुल पांच सीटें रिक्त हुई थीं। इनमें से चार सीटें पहले तृणमूल कांग्रेस के पास थीं, जबकि एक सीट भारतीय जनता पार्टी के पास थी।

सभी उम्मीदवारों ने पांच मार्च को विधानसभा में अपने नामांकन पत्र दाखिल किए थे और प्रारंभिक कार्यक्रम के अनुसार इन सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को होना तय था। लेकिन अंतिम चरण में जब उम्मीदवारों की संख्या सीटों के बराबर ही रह गई, तब मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी और सभी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

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