RevenueStrike – बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल पर सरकार सख्त, कार्रवाई की तैयारी
RevenueStrike – बिहार में अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारियों की जारी हड़ताल के बीच राज्य सरकार अब सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी कई अधिकारी काम पर नहीं लौटे, जिसके कारण राज्य के आधे से अधिक अंचल कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा। जमीन से जुड़े मामलों, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन और विभिन्न प्रमाणपत्रों के निर्गमन जैसे जरूरी काम ठप पड़ने से आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

जिलों से मांगी गई अधिकारियों की उपस्थिति रिपोर्ट
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्थिति का आकलन करने के लिए जिलों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। विभाग ने भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय, भू-अर्जन निदेशालय और चकबंदी निदेशालय के निदेशकों के साथ-साथ सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारियों की उपस्थिति का ब्यौरा मांगा है।
विभाग के निर्देश में कहा गया है कि बिहार राजस्व सेवा संवर्ग के अधिकारी नौ मार्च से हड़ताल पर हैं। ऐसे में जिलों से यह जानकारी मांगी गई है कि कितने अधिकारी अपने कार्यस्थल पर उपस्थित हैं और कितने हड़ताल में शामिल हैं। इसके लिए निर्धारित प्रपत्र में विस्तृत जानकारी भेजने को कहा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर विभाग आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय करेगा और अंचल कार्यालयों के संचालन को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने पर सरकार का जोर
राज्य सरकार का कहना है कि अंचल कार्यालयों का काम सीधे तौर पर आम जनता से जुड़ा होता है। जमीन से संबंधित मामलों के अलावा आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज भी इन्हीं कार्यालयों से जारी होते हैं। ऐसे में लंबे समय तक कामकाज ठप रहने से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि बड़ी संख्या में अधिकारी हड़ताल पर बने रहते हैं तो सरकार वैकल्पिक व्यवस्था करने पर भी विचार कर सकती है। साथ ही हड़ताल में शामिल अधिकारियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
पांच अधिकारियों के त्यागपत्र पहले ही हो चुके स्वीकार
इस बीच राजस्व सेवा से जुड़े पांच अधिकारियों के त्यागपत्र को भी राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। उप मुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जिलाधिकारियों से प्राप्त अनुशंसाओं के आधार पर इन अधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए हैं।
वैशाली जिले के गोरौल अंचल में पदस्थापित रहे अंचलाधिकारी अंशु कुमार का त्यागपत्र 19 दिसंबर 2025 से प्रभावी माना गया है। रोहतास जिले के बिक्रमगंज के राजस्व अधिकारी रहे राजन कुमार का इस्तीफा 26 जून 2025 से स्वीकार किया गया है।
इसी तरह सारण जिले के परसा की राजस्व अधिकारी रहीं शिवांगी पांडेय का त्यागपत्र 7 मई 2025 से प्रभावी माना गया है। रोहतास जिले के राजपुर की तत्कालीन अंचलाधिकारी अंकिता वर्मा का त्यागपत्र 27 अगस्त 2024 से स्वीकृत किया गया है। वहीं हाजीपुर सदर में पदस्थापित रहीं राजस्व अधिकारी स्मृति कुमारी का इस्तीफा 20 अगस्त 2025 से प्रभावी माना गया है। इन सभी मामलों में संबंधित जिलाधिकारियों की अनुशंसा और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद औपचारिक आदेश जारी किए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने पहले ही दी थी चेतावनी
इससे पहले राजस्व विभाग के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर आयोजित एक प्रेस वार्ता में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताल को लेकर स्पष्ट चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि हड़ताल पर रहने वाले अधिकारियों की अनुपस्थिति के दिनों की गणना की जा रही है और यदि कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
विजय सिन्हा ने यह भी कहा था कि सरकारी सेवा में कार्य करना जिम्मेदारी का विषय है और अधिकारियों को सेवा भाव के साथ काम करना चाहिए। उनके अनुसार मार्च का महीना विभाग के लिए महत्वपूर्ण होता है और इस समय कामकाज रुकने से जनता के बीच गलत संदेश जाता है।
काम पर लौटने की अपील और कार्रवाई की चेतावनी
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों से जल्द काम पर लौटने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि जो अधिकारी काम पर वापस आ जाएंगे, उनकी मांगों पर सरकार विचार करने के लिए तैयार है। हालांकि जो लोग हड़ताल जारी रखेंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि यदि स्थिति लंबी खिंचती है और अधिकारी स्थायी रूप से हड़ताल पर जाते हैं, तो सरकार विभाग में नई नियुक्तियां करने का विकल्प भी देख सकती है। सरकार का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित होने नहीं दिया जाएगा और आम जनता की सेवाएं प्राथमिकता बनी रहेंगी।



