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RTEAdmission – राजस्थान में निजी स्कूलों के लिए आरटीई लॉटरी परिणाम जारी

RTEAdmission – राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाने की प्रक्रिया के तहत आरटीई प्रवेश लॉटरी का परिणाम जारी कर दिया गया है। जिन अभिभावकों ने अपने बच्चों के लिए आवेदन किया था, वे अब राज्य के आधिकारिक पोर्टल rajpsp.nic.in पर जाकर यह देख सकते हैं कि उनके बच्चे का नाम चयन सूची में आया है या नहीं। साथ ही यह भी जानकारी मिल जाएगी कि बच्चे को किस निजी विद्यालय में सीट आवंटित हुई है। राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से चयनित विद्यार्थियों की सूची सार्वजनिक की।

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बड़ी संख्या में आए आवेदन

इस वर्ष आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। राज्यभर से कुल 6.25 लाख से अधिक बच्चों को लॉटरी प्रक्रिया में शामिल किया गया। आंकड़ों के अनुसार 3.29 लाख से अधिक बालक और लगभग 2.95 लाख बालिकाओं ने आवेदन किया। इसके अलावा 11 थर्ड जेंडर आवेदक भी इस प्रक्रिया में शामिल हुए। इन आवेदनों के आधार पर प्राथमिकता सूची तैयार की गई है, जिसके आधार पर चरणबद्ध तरीके से सीटों का आवंटन किया जाएगा।

चार कक्षाओं में लिए गए आवेदन

इस बार प्रवेश प्रक्रिया के तहत पीपी 3 प्लस, पीपी 4 प्लस, पीपी 5 प्लस और पहली कक्षा के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। इनमें लगभग 3.39 लाख आवेदन विशेष रूप से नर्सरी और पहली कक्षा के लिए प्राप्त हुए हैं। आरटीई के नियमों के अनुसार निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। नर्सरी कक्षा में सभी आरक्षित सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा, जबकि अन्य कक्षाओं में खाली सीटों के आधार पर चयन किया जाएगा। अभिभावकों को आवेदन करते समय अधिकतम पांच स्कूल चुनने का विकल्प दिया गया था।

31 हजार से अधिक निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर

राज्य के करीब 31,500 निजी विद्यालय इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इन स्कूलों में आरक्षित सीटों पर बच्चों को निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। शिक्षा विभाग के अनुसार लॉटरी पूरी तरह पारदर्शी तरीके से तैयार की गई है और इसके लिए तकनीकी सहायता का उपयोग किया गया है। इससे यह सुनिश्चित किया गया कि सभी आवेदकों को समान अवसर मिल सके।

ऐसे देखें अपने बच्चे का परिणाम

अभिभावक अपने बच्चे की प्राथमिकता सूची ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए उन्हें निजी स्कूल पोर्टल rajpsp.nic.in पर जाना होगा। वहां आवेदन आईडी और मोबाइल नंबर की मदद से लॉगिन करना होगा। लॉगिन के बाद अभिभावक यह देख सकेंगे कि उन्होंने जिन स्कूलों के लिए आवेदन किया था, उनमें उनके बच्चे का स्थान किस क्रम पर है। यही क्रम आगे सीट आवंटन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कई चरणों में होगी सीटों की प्रक्रिया

आरटीई प्रवेश प्रक्रिया एक ही चरण में पूरी नहीं होती, बल्कि इसे कई चरणों में लागू किया जाता है। 12 मार्च को ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से बच्चों की प्राथमिकता सूची तय की गई है। इसके बाद अभिभावकों को 12 से 16 मार्च के बीच अपने स्कूल विकल्पों में बदलाव करने का मौका दिया गया है। पहला सीट आवंटन 17 मार्च को किया जाएगा और इसके बाद संबंधित विद्यालयों में 17 से 25 मार्च तक दस्तावेजों का सत्यापन होगा।

यदि पहले चरण के बाद सीटें खाली रह जाती हैं तो दूसरी सूची 7 अप्रैल को जारी की जाएगी और उसके बाद फिर दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया होगी। इसके बाद भी सीटें बचने पर 22 अप्रैल को तीसरे चरण का आवंटन किया जाएगा। इस तरह पूरी प्रक्रिया अप्रैल के अंत तक पूरी होने की संभावना है।

प्राथमिकता तय करने की प्रक्रिया

लॉटरी के जरिए तैयार की गई सूची को अंतिम चयन सूची नहीं माना जाता। यह केवल प्राथमिकता सूची होती है। अंतिम प्रवेश तभी सुनिश्चित होता है जब विद्यालय स्तर पर अभिभावकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हो जाता है। प्राथमिकता तय करते समय सबसे पहले उस वार्ड या गांव के बच्चों को वरीयता दी जाती है जहां संबंधित स्कूल स्थित होता है। इसके बाद उसी पंचायत या नगर क्षेत्र के अन्य आवेदकों को मौका मिलता है।

विशेष श्रेणियों को प्राथमिकता

आरटीई नियमों के तहत कुछ श्रेणियों के बच्चों को अतिरिक्त प्राथमिकता भी दी जाती है। इनमें अनाथ बच्चे और दिव्यांग बच्चे शामिल हैं। इसके अलावा सीटों के आवंटन के लिए एक निर्धारित रोस्टर प्रणाली का पालन किया जाता है, जिसके तहत हर स्कूल में कुल सीटों के एक हिस्से को आरटीई के लिए आरक्षित रखा जाता है।

प्रवेश के लिए जरूरी दस्तावेज

प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए अभिभावकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। इनमें निवास प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र प्रमुख हैं। निवास प्रमाण के तौर पर राशन कार्ड, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस या बिजली-पानी का बिल स्वीकार किया जाता है। वहीं आय प्रमाण पत्र में यह साबित करना जरूरी है कि अभिभावकों की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपये या उससे कम है। इसके अलावा वर्ग प्रमाण पत्र, बीपीएल कार्ड, बच्चे का आधार कार्ड और फोटो भी जरूरी दस्तावेजों में शामिल हैं।

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