SmartMeter – यूपी में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लागू होते ही हजारों घरों की बिजली प्रभावित
SmartMeter – उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर प्रणाली लागू होने के बाद कई उपभोक्ताओं को तकनीकी और बिलिंग से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जहां उपभोक्ताओं ने रिचार्ज कराने के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने की बात कही है। प्रभावित लोग बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं और समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं। इस बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने ऐसे उपभोक्ताओं को मुआवजा देने की मांग उठाई है जिनकी बिजली रिचार्ज के बाद भी चालू नहीं हुई।

उपभोक्ता परिषद ने मुआवजे की मांग उठाई
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियमों के अनुसार यदि उपभोक्ता द्वारा भुगतान करने के बाद भी बिजली कनेक्शन समय पर बहाल नहीं किया जाता है तो मुआवजे का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि कनेक्शन जुड़ने में देरी होने पर प्रतिदिन 50 रुपये तक मुआवजा दिए जाने का नियम लागू होता है।
उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली लागू होने के बाद कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां उपभोक्ताओं ने तुरंत बकाया राशि जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। ऐसे मामलों में प्रभावित उपभोक्ताओं को नियमानुसार राहत मिलनी चाहिए।
रीचार्ज के बाद भी कई कनेक्शन नहीं जुड़े
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 14 मार्च की शाम तक प्रदेश के विभिन्न बिजली वितरण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन नेगेटिव बैलेंस के कारण स्वतः कट गए थे। इन क्षेत्रों में पूर्वांचल, मध्यांचल, दक्षिणांचल, पश्चिमांचल और केस्को शामिल हैं।
डेटा के मुताबिक कुल 1,13,862 उपभोक्ताओं के कनेक्शन नकारात्मक बैलेंस के चलते बंद हुए थे। इनमें से कई उपभोक्ताओं ने तुरंत भुगतान कर दिया, लेकिन 16,000 से अधिक मामलों में ही कनेक्शन दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो सकी। करीब तीन हजार उपभोक्ताओं के कनेक्शन ऐसे रहे, जिनमें भुगतान के बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई। परिषद का कहना है कि इन मामलों की जांच कराई जानी चाहिए।
भुगतान के विकल्प की मांग
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि बकाया भुगतान से जुड़े नियमों में भी सुधार की जरूरत है। फिलहाल पोस्टपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं को बकाया बिल का एक हिस्सा जमा कर बाकी रकम किस्तों में चुकाने का विकल्प मिलता है।
परिषद के अध्यक्ष का कहना है कि इसी तरह की सुविधा स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को भी दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि अचानक पूरी रकम जमा करना कई परिवारों के लिए कठिन हो सकता है, इसलिए किस्तों का विकल्प मिलने से उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
नियामक आयोग के सामने उठेगा मामला
इस मुद्दे को राज्य विद्युत नियामक आयोग के सामने भी उठाने की तैयारी की जा रही है। परिषद का कहना है कि प्रदेश में लाखों उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर खातों में बैलेंस नकारात्मक हो गया है।
बताया जा रहा है कि 50 लाख से अधिक उपभोक्ता ऐसे हैं जिनके खातों में बकाया राशि दिखाई दे रही है। परिषद की योजना है कि आयोग के सामने यह मांग रखी जाए कि प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को भी किस्तों में भुगतान की सुविधा दी जाए, ताकि अचानक बिजली कटने की समस्या कम हो सके।
स्मार्ट मीटर योजना के पीछे की पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत देशभर में पारंपरिक बिजली मीटरों को धीरे-धीरे स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है।
पहले अधिकांश मीटर पोस्टपेड प्रणाली पर आधारित थे, जिसमें उपभोक्ता बिजली उपयोग के बाद बिल का भुगतान करते थे। स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद कई स्थानों पर इन्हें प्रीपेड मोड में परिवर्तित किया गया है, जिसमें उपभोक्ताओं को पहले से रिचार्ज करना पड़ता है।
आंशिक भुगतान पर अस्थायी राहत
पावर कॉरपोरेशन ने हाल ही में एक आदेश जारी कर बताया है कि यदि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन नकारात्मक बैलेंस के कारण कट गया है तो बकाया राशि का 50 प्रतिशत जमा करने पर तीन दिन के लिए बिजली आपूर्ति बहाल की जा सकती है।
हालांकि यह सुविधा केवल एक बार के लिए दी जाएगी। निर्धारित समय के भीतर यदि पूरा भुगतान या पर्याप्त रिचार्ज नहीं किया गया तो बिजली आपूर्ति फिर से बंद हो सकती है। विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को अस्थायी राहत देने के उद्देश्य से लागू की गई है।



