Infrastructure – जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन, बढ़ेगी कनेक्टिविटी…
Infrastructure – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर स्थित जेवर में बने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह परियोजना लंबे समय से चर्चा में थी और अब इसका पहला चरण पूरा होने के साथ इसे औपचारिक रूप से शुरू कर दिया गया है। इस एयरपोर्ट को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए एक अहम आधारभूत ढांचा माना जा रहा है।

परियोजना की शुरुआत और पृष्ठभूमि
नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की अवधारणा करीब ढाई दशक पुरानी है। वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह के कार्यकाल में इसे एक ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एविएशन हब के रूप में प्रस्तावित किया गया था। केंद्र सरकार ने 2003 में इसकी तकनीकी व्यवहार्यता को मंजूरी भी दी, लेकिन इसके बाद यह योजना लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ पाई। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने ही इस परियोजना की आधारशिला रखी थी, जिसके बाद निर्माण कार्य ने गति पकड़ी और अब इसका उद्घाटन संभव हो सका है।
निर्माण और भागीदारी की संरचना
इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए वर्ष 2019 में वैश्विक स्तर पर निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसमें ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल ने प्रतिस्पर्धी बोली लगाकर परियोजना का ठेका हासिल किया। इसके बाद अक्टूबर 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार और कंपनी के बीच औपचारिक समझौता हुआ। इस परियोजना को एक संयुक्त उपक्रम के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें राज्य सरकार, नोएडा प्राधिकरण, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की हिस्सेदारी तय की गई है।
कनेक्टिविटी को लेकर बड़े दावे
एयरपोर्ट को सड़क, रेल और मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की व्यापक योजना बनाई गई है। गाजियाबाद से जेवर के बीच प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम इस कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। इसके अलावा दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे और यमुना एक्सप्रेस-वे से भी इसे जोड़ा जा रहा है। भविष्य में यहां तक मेट्रो विस्तार और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के स्टेशन की भी योजना है, जिससे यात्रियों को बहुआयामी परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
क्षेत्रीय विकास में संभावित भूमिका
इस एयरपोर्ट के शुरू होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा के साथ-साथ अलीगढ़, मेरठ, मथुरा, बुलंदशहर और आगरा जैसे शहरों के लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण हवाई केंद्र बन सकता है। इसके अलावा दिल्ली और गुरुग्राम में बढ़ते हवाई यातायात दबाव को कम करने में भी यह एयरपोर्ट सहायक साबित हो सकता है।
क्षमता और लागत का आकलन
पहले चरण में इस एयरपोर्ट को हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों को संभालने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। शुरुआत में इस चरण को तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य था, हालांकि महामारी के कारण इसमें कुछ देरी हुई। परियोजना के पहले चरण पर करीब 5730 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जबकि सभी चरण पूरे होने तक कुल लागत लगभग 29,560 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
भविष्य की विस्तार योजना
इस एयरपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। प्रत्येक चरण में इसकी यात्री क्षमता बढ़ाई जाएगी और अंतिम चरण तक यह हर साल करीब 7 करोड़ यात्रियों को संभालने में सक्षम होगा। पूरी परियोजना को लगभग 30 वर्षों में पूरा करने की योजना है। इसके साथ ही इसे देश के प्रमुख एविएशन हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर यातायात और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सके।