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DollarVsGold – युद्ध के बीच निवेशकों का झुकाव डॉलर की ओर बढ़ा

DollarVsGold – अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच निवेशकों की रणनीति में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। आमतौर पर संकट के समय सोना सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में तस्वीर कुछ अलग है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच बड़ी संख्या में निवेशक अब डॉलर को ज्यादा सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं। बाजार के जानकारों के मुताबिक, वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक संकेतकों ने इस बदलाव को और तेज कर दिया है।

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सोने की भूमिका अब भी बनी हुई

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही मौजूदा समय में सोना दबाव में दिख रहा हो, लेकिन इसकी अहमियत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। जब भी वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ती है या किसी देश की मुद्रा कमजोर होती है, तब सोना एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। हालांकि फिलहाल ऊंची तेल कीमतें और महंगाई की आशंका के कारण डॉलर को बढ़त मिल रही है, लेकिन लंबी अवधि में सोने की उपयोगिता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।

कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से निवेशक सतर्क

युद्ध शुरू होने के बाद सोने की कीमतों में पहले तेजी आई, लेकिन इसके बाद तेज गिरावट भी देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 15 प्रतिशत तक नीचे आ चुका है। इस साल सोने ने रिकॉर्ड स्तर को छुआ था, लेकिन बाद में इसमें गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। खासतौर पर वे निवेशक प्रभावित हुए, जिन्होंने ऊंचे दाम पर निवेश किया था।

डॉलर मजबूत होने के पीछे कारण

डॉलर की मजबूती के पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल का कारोबार है, जो मुख्य रूप से डॉलर में होता है। मध्य-पूर्व में तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं। इसका सीधा असर डॉलर की मांग पर पड़ा है, जो इसे और मजबूत बना रहा है।

सोने की मांग पर पड़ा असर

जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की मांग में कमी आई है। इसके चलते कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। निवेशकों का रुझान फिलहाल नकदी और डॉलर आधारित संपत्तियों की ओर ज्यादा झुका हुआ है।

ब्याज दरों का भी अहम योगदान

अमेरिका में ब्याज दरें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिसका असर भी निवेशकों के फैसलों पर पड़ रहा है। जब ब्याज दरें ज्यादा होती हैं, तो निवेशक ऐसे विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं, जहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिलता है। सोना चूंकि ब्याज नहीं देता, इसलिए ऐसे समय में इसकी मांग कम हो जाती है और निवेशक डॉलर या अन्य वित्तीय साधनों की ओर रुख करते हैं।

निवेशकों के लिए क्या संकेत

मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है। जहां एक ओर डॉलर फिलहाल मजबूत नजर आ रहा है, वहीं सोना भी लंबे समय के लिए एक सुरक्षित विकल्प बना रह सकता है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह देते हैं कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निर्णय लें।

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