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EducationNews – कन्नूर डेंटल कॉलेज छात्र मौत पर उठे गंभीर सवाल

EducationNews – केरल के कन्नूर स्थित एक डेंटल कॉलेज में बीडीएस के प्रथम वर्ष के छात्र नितिन राज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने राज्य की राजनीति और शैक्षणिक माहौल दोनों को झकझोर दिया है। तिरुवनंतपुरम के उझामलक्कल गांव से आने वाले नितिन की कॉलेज परिसर में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई। घटना के बाद परिवार ने जो आरोप लगाए हैं, उन्होंने मामले को और गंभीर बना दिया है। परिवार का कहना है कि नितिन को उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि, रंग और आर्थिक स्थिति के कारण लगातार अपमान और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था।

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परिवार के आरोपों ने बढ़ाई चिंता

नितिन के परिजनों ने दावा किया है कि कॉलेज में उसे बार-बार उसकी जाति और पारिवारिक स्थिति को लेकर नीचा दिखाया जाता था। उनके अनुसार, यह केवल एक सामान्य छात्र जीवन का दबाव नहीं था, बल्कि व्यवस्थित रूप से किया जा रहा मानसिक उत्पीड़न था। परिवार ने यह भी कहा कि नितिन ने कई बार अपनी परेशानी जाहिर की थी, लेकिन उसे कोई ठोस मदद नहीं मिल सकी। इस मामले ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव के मुद्दे को सामने ला दिया है।

कांग्रेस ने की एसआईटी जांच की मांग

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने राज्य सरकार से इस मामले की गहन जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नितिन के सहपाठियों और परिवार द्वारा एक फैकल्टी सदस्य पर लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वेणुगोपाल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि मामले की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जांच किसी विशेष जांच दल को सौंपी जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

केवल निलंबन पर्याप्त नहीं, उठ रहे सवाल

कांग्रेस नेता ने इस बात पर भी चिंता जताई कि फिलहाल केवल दो शिक्षकों को निलंबित करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं मानी जा सकती। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। वेणुगोपाल ने कहा कि यदि दोषियों को बचाने के लिए जांच को कमजोर करने की कोशिश की गई, तो उनकी पार्टी इसका विरोध करेगी। साथ ही उन्होंने नितिन के परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कानूनी मदद देने का आश्वासन भी दिया।

छात्रों के खुलासों से माहौल पर सवाल

मामले में छात्रों द्वारा सामने आई बातें भी चिंताजनक हैं। कुछ छात्रों का कहना है कि कॉलेज में शिकायत करने वालों को अलग-थलग कर दिया जाता है और उन्हें शैक्षणिक रूप से परेशान किया जाता है। आरोप यह भी हैं कि प्रैक्टिकल परीक्षाओं में जानबूझकर फेल किया जाता है और इंटरनल मार्क्स कम दिए जाते हैं। इस तरह का माहौल किसी भी छात्र के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है।

पहले भी लगे थे आरोप, कार्रवाई पर सवाल

बताया जा रहा है कि जिस शिक्षक पर इस मामले में आरोप लगाए गए हैं, उनके खिलाफ पहले भी इसी तरह की शिकायत सामने आई थी। इसके बावजूद उन्हें सेवा में बने रहने दिया गया, जिससे कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने संस्थागत जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।

निष्पक्ष जांच और सख्त कदमों की मांग

घटना के बाद अब सरकार और पुलिस पर दबाव बढ़ गया है कि वे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करें। सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। यह मामला केवल एक छात्र की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली में मौजूद गंभीर खामियों की ओर भी इशारा करता है।

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