EnergyCrisis – ईंधन संकट के बीच सेना ने अपनाई नई ऊर्जा रणनीति
EnergyCrisis – वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और ईरान से जुड़े हालात के बीच ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को देखते हुए भारतीय सेना ने अपने संचालन में बदलाव की तैयारी कर ली है। तेल और गैस की संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए सेना अब पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस नई योजना के तहत एलपीजी और अन्य फ्यूल के उपयोग में कमी लाने के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह पहल अगले महीने से मिशन मोड में लागू की जाएगी, जिससे दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

बायोगैस और सोलर ऊर्जा की ओर बढ़ते कदम
सेना ने ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बायोगैस और सौर ऊर्जा जैसे विकल्पों को अपनाना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बायोगैस स्टोव की खरीद के लिए ऑर्डर जारी कर दिए गए हैं, जिससे रसोई गैस की खपत को कम किया जा सके। इसके अलावा, कई सैन्य ठिकानों पर सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया भी तेज की जा रही है। इन कदमों का उद्देश्य न केवल ईंधन बचाना है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल व्यवस्था विकसित करना भी है।
सीमित होगा वाहनों और जवानों का मूवमेंट
फ्यूल की खपत को नियंत्रित करने के लिए सेना ने अपने वाहनों और जवानों की आवाजाही पर भी नजर रखना शुरू कर दिया है। नई योजना के तहत सैनिकों का मूवमेंट 400 किलोमीटर के दायरे में सीमित रखा जाएगा। साथ ही, वाहनों की पूलिंग और एक साथ कई कार्यों को पूरा करने की रणनीति अपनाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन उपायों से ईंधन की बचत होगी, जबकि सैन्य अभियानों की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों का बढ़ेगा उपयोग
सेना अब धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक और सीएनजी आधारित वाहनों के उपयोग को बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है। कुछ स्थानों पर यह बदलाव पहले ही लागू किया जा चुका है, जबकि अन्य क्षेत्रों में अगले कुछ हफ्तों में इसे लागू करने की योजना है। इसके साथ ही, सैन्य उड़ानों को भी आवश्यकतानुसार सीमित किया जाएगा, ताकि फ्यूल की खपत को संतुलित रखा जा सके।
सोलर प्लांट और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की योजना
आंकड़ों के अनुसार, सेना में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कुकिंग गैस और ईंधन की खपत होती है। ऐसे में बायोगैस के उपयोग से लगभग 20 प्रतिशत तक गैस बचत की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, सेना के पास करीब दो लाख वाहन हैं, जिनमें प्रतिदिन भारी मात्रा में फ्यूल खर्च होता है। इस चुनौती से निपटने के लिए सेना ने अगले पांच वर्षों में खाली पड़ी जमीन पर बड़े पैमाने पर सोलर प्लांट और पवन चक्कियां स्थापित करने की योजना बनाई है। यह पहल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।