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BookLaunch – पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की नई किताब में दिखी सैन्य रहस्यों की पड़ताल

BookLaunch – पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे एक बार फिर अपनी नई किताब को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में संसद में उनकी एक अप्रकाशित पुस्तक को लेकर उठे विवाद के बाद अब उनकी नई नॉन-फिक्शन किताब जारी की गई है। इस बार उन्होंने सैन्य जगत से जुड़े ऐसे पहलुओं को सामने लाने की कोशिश की है, जिन पर आमतौर पर कम चर्चा होती है। उनकी यह नई पुस्तक सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े अनुभवों और दिलचस्प तथ्यों पर आधारित है।

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नई किताब में क्या है खास

जनरल नरवणे की इस नई किताब का शीर्षक ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ है। प्रकाशक के अनुसार, इसमें भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़े कई ऐसे पहलुओं को शामिल किया गया है, जो आम लोगों के लिए कम परिचित हैं। किताब में सैन्य परंपराओं, किस्सों और रहस्यों को सरल और रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, इसमें यह भी दिखाने की कोशिश की गई है कि किस तरह सैनिकों की जिज्ञासा और साहस उनके काम का अहम हिस्सा होती है।

सैन्य मिथकों और परंपराओं पर फोकस

इस पुस्तक में केवल घटनाओं का वर्णन नहीं है, बल्कि उन मान्यताओं और धारणाओं की भी पड़ताल की गई है जो वर्षों से सैन्य व्यवस्था का हिस्सा रही हैं। लेखक ने इन मिथकों को तथ्यों के साथ जोड़कर समझाने का प्रयास किया है, जिससे पाठकों को एक संतुलित दृष्टिकोण मिल सके। किताब में ऐसे कई प्रसंग शामिल हैं जो यह बताते हैं कि सैन्य जीवन केवल अनुशासन तक सीमित नहीं, बल्कि उसमें मानवीय अनुभव और जिज्ञासा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

शशि थरूर की किताब से मिली प्रेरणा

जनरल नरवणे ने अपनी किताब की प्रस्तावना में एक दिलचस्प बात साझा की है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक परिचित के घर पर उनकी नजर कांग्रेस नेता शशि थरूर की किताब ‘अ वंडरलैंड ऑफ वर्ड्स’ पर पड़ी थी। उसी दौरान उन्हें इस तरह की पुस्तक लिखने का विचार आया। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर भी स्वीकार किया कि उस पुस्तक ने उन्हें नए अंदाज में लिखने के लिए प्रेरित किया।

पहले की किताब पर हुआ था विवाद

इससे पहले जनरल नरवणे की एक अन्य पुस्तक ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर काफी विवाद हुआ था। यह पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई थी, लेकिन संसद में इसके कुछ हिस्सों का जिक्र होने के बाद मामला गरमा गया। उस दौरान विपक्ष के एक नेता ने इसके अंशों का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल उठाने की कोशिश की थी। हालांकि, संसद में अप्रकाशित सामग्री का उल्लेख करने पर आपत्ति जताई गई और उन्हें रोक दिया गया।

प्रकाशक की स्थिति और स्पष्टता

विवाद बढ़ने के बाद संबंधित प्रकाशन संस्था ने भी स्थिति स्पष्ट की थी। प्रकाशक ने कहा था कि उस पुस्तक के प्रकाशन अधिकार उनके पास हैं, लेकिन उसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस बयान के बाद यह साफ हो गया था कि जिस सामग्री को लेकर चर्चा हो रही थी, वह आधिकारिक रूप से उपलब्ध ही नहीं थी।

नई किताब से बदला फोकस

विवादों से अलग हटकर जनरल नरवणे की यह नई किताब एक अलग दिशा में जाती दिखती है। इसमें किसी राजनीतिक संदर्भ के बजाय सैन्य जीवन के अनुभवों और दिलचस्प तथ्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए खास हो सकती है जो भारतीय सशस्त्र बलों के कामकाज और उनकी परंपराओं को करीब से समझना चाहते हैं।

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