उत्तराखण्ड

SpecialSession – उत्तराखंड विधानसभा में 28 अप्रैल को महिला आरक्षण मुद्दे पर होगा विशेष सत्र

SpecialSession – उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 28 अप्रैल को देहरादून में आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधायी विभाग ने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, इस सत्र में कोई विधायी कार्य नहीं होगा, बल्कि मुख्य रूप से महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा केंद्रित रहेगी। खासतौर पर संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों के रुख पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।

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सत्र का मुख्य एजेंडा क्या रहेगा

सूत्रों के मुताबिक, इस विशेष सत्र में ‘नारी सम्मान लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर चर्चा की जाएगी। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने भी संकेत दिया है कि यह सत्र महिलाओं की भागीदारी और अधिकारों को लेकर व्यापक संवाद का मंच बनेगा। साथ ही, विपक्ष के रुख को लेकर निंदा प्रस्ताव लाए जाने की भी चर्चा है, खासकर उस संदर्भ में जब संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक पारित नहीं हो सका।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

संसद में महिला आरक्षण विधेयक पारित न होने को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच पहले से ही तीखी बयानबाजी चल रही है। भाजपा का आरोप है कि विपक्षी दलों के समर्थन के अभाव में यह महत्वपूर्ण विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया। पार्टी का कहना है कि इससे भविष्य में महिलाओं को मिलने वाले प्रतिनिधित्व पर असर पड़ा है, खासकर 2029 के लोकसभा चुनावों को लेकर।

कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

इस प्रस्तावित सत्र को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में महिला आरक्षण के प्रति गंभीर है, तो उसे केवल चर्चा तक सीमित न रहकर ठोस कदम उठाने चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि राज्य विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव पारित कर इसे केंद्र को भेजा जाए।

विपक्ष का आरोप: राजनीतिक लाभ के लिए सत्र

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने संयुक्त रूप से सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह विशेष सत्र राजनीतिक उद्देश्य से बुलाया जा रहा है। उनका आरोप है कि सत्तारूढ़ दल इस मंच का उपयोग विपक्ष की आलोचना करने के लिए करना चाहता है, जबकि असल मुद्दे पर ठोस पहल नहीं की जा रही।

जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की तैयारी

कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए हैं कि वे महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनता के बीच जाएं और अपनी बात रखें। पार्टी का कहना है कि इस विषय पर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है, जिसे दूर करना जरूरी है। इसके लिए गांव और स्थानीय स्तर तक संवाद अभियान चलाने की योजना बनाई गई है।

लागू करने को लेकर उठे सवाल

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने यह भी सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो उसे लागू करने में देरी क्यों हो रही है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार को मौजूदा सीटों पर ही आरक्षण लागू करना चाहिए, ताकि महिलाओं को वास्तविक लाभ मिल सके।

आगे क्या संकेत

इस विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। एक ओर जहां इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। 28 अप्रैल को होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट हो सकता है कि राज्य स्तर पर इस मुद्दे को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

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