बिहार

Corruption – विश्वविद्यालय और नगर पंचायत में घूसखोरी पर हुई बड़ी कार्रवाई

Corruption – बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत मंगलवार को दो अलग-अलग मामलों में अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। पहला मामला पटना स्थित मौलाना मजहरूल हक अरबी-फारसी विश्वविद्यालय से जुड़ा है, जहां सहायक कुलसचिव मो. सनाउल्लाह खान को 2.50 लाख रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने उनके कार्यालय में छापेमारी कर यह कार्रवाई की। शिकायत के अनुसार, समस्तीपुर के एक छात्र प्रतिनिधि ने आरोप लगाया था कि छात्रों के परीक्षाफल में प्रैक्टिकल अंक जोड़ने के लिए पैसे की मांग की जा रही थी।

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छात्रों के परिणाम से जुड़ा था मामला

शिकायत में बताया गया था कि केआरसी-402 और 403 केंद्र के कई छात्रों का परिणाम जारी होने के बावजूद प्रैक्टिकल अंक नहीं जोड़े गए थे। आरोप है कि लंबित परिणाम जारी करने और अंक अपडेट करने के बदले रिश्वत मांगी जा रही थी। निगरानी विभाग ने इस शिकायत की जांच की और आरोप सही पाए जाने के बाद जाल बिछाकर आरोपी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

निगरानी विभाग की कार्रवाई तेज

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, इस वर्ष अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की गई है। विभाग ने 49 प्राथमिकी दर्ज की हैं, जिनमें से अधिकांश ट्रैप केस हैं। इन मामलों में अब तक 49 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और लाखों रुपये की नकदी भी बरामद की गई है। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा।

जमुई में भी घूस लेते अधिकारी गिरफ्तार

दूसरी कार्रवाई जमुई जिले में हुई, जहां विशेष निगरानी इकाई ने सिकंदरा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और एक अन्य कर्मचारी को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फाइल पास करने के लिए प्रति फाइल तय राशि की मांग की जा रही थी। इस मामले में भी निगरानी टीम ने योजना बनाकर आरोपियों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

योजना का लाभ देने के बदले मांगी जा रही थी रकम

शिकायत के मुताबिक, आवास योजना के लाभार्थियों से फाइल मंजूरी के नाम पर पैसे लिए जा रहे थे। आरोपियों ने कथित तौर पर कहा था कि तय रकम नहीं देने पर आवेदन आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इस शिकायत के आधार पर विशेष निगरानी इकाई ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उन्हें पटना लाया जा रहा है, जहां विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

भ्रष्टाचार पर सख्ती का संदेश

इन दोनों घटनाओं के बाद राज्य में प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट संदेश गया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। निगरानी एजेंसियां लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए हैं और शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।

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