BankingIssue – बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचे व्यक्ति ने खींचा ध्यान
BankingIssue – ओडिशा के क्योंझर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग प्रक्रियाओं और मानवीय संवेदनाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत बहन की हड्डियां लेकर बैंक पहुंच गया, क्योंकि वह कई महीनों से उसके खाते में जमा रकम निकालने की कोशिश कर रहा था लेकिन हर बार उसे लौटा दिया जा रहा था। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और लंबित प्रक्रिया को पूरा कराकर राशि दिलाई गई।

कई महीनों से बैंक के चक्कर लगा रहा था व्यक्ति
डियानाली गांव के रहने वाले 52 वर्षीय जीतू मुंडा अपनी बहन कलारा मुंडा के बैंक खाते में जमा पैसे निकालना चाहते थे। बताया जाता है कि वह करीब तीन महीने से मल्लिपसी स्थित ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा के चक्कर लगा रहे थे। खाते में करीब 19 हजार रुपये जमा थे, जो दोनों भाई-बहन की मेहनत की कमाई थी। लेकिन आवश्यक दस्तावेज, खासकर मृत्यु प्रमाण पत्र, प्रस्तुत न कर पाने के कारण उन्हें बार-बार वापस भेज दिया गया।
बहन की मौत के बाद बढ़ी आर्थिक परेशानी
कलारा मुंडा अपने पति और बेटे के निधन के बाद भाई के साथ ही रह रही थीं। दोनों दिहाड़ी मजदूरी कर जैसे-तैसे गुजारा करते थे। आर्थिक तंगी इतनी थी कि कई बार उन्हें गांव में दूसरों से भोजन मांगना पड़ता था। बताया गया कि बीमारी के दौरान भी जीतू ने बैंक से पैसे निकालने की कोशिश की थी ताकि बहन का इलाज कराया जा सके, लेकिन नियमों का हवाला देकर उसे रकम नहीं दी गई। इसी बीच 26 जनवरी को कलारा का निधन हो गया।
हताशा में उठाया असामान्य कदम
लगातार कोशिशों के बावजूद समाधान न मिलने पर जीतू ने ऐसा कदम उठाया जिसने सभी को चौंका दिया। वह अपनी बहन के अवशेष लेकर बैंक पहुंच गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, बैंक अधिकारियों ने उनसे मृत्यु का प्रमाण मांगा था और इसी दबाव में उन्होंने यह कदम उठाया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
प्रशासन के दखल के बाद सुलझा मामला
घटना के सार्वजनिक होने के बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आए। अधिकारियों ने बैंक पहुंचकर स्थिति की जांच की और संबंधित पक्षों से बातचीत की। बाद में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कराई गई, जिसके बाद खाते में जमा 19,402 रुपये की राशि परिजनों को सौंप दी गई। जिला प्रशासन ने मानवीय आधार पर जीतू को अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
बैंक ने नियमों का दिया हवाला
बैंक अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने केवल निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया। शाखा प्रबंधक के अनुसार, खाताधारक की मृत्यु के बाद राशि निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकार से जुड़े दस्तावेज जरूरी होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति इन प्रक्रियाओं को ठीक से समझ नहीं पाया। हालांकि, यह भी स्वीकार किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में दस्तावेजी प्रक्रिया जटिल होने के कारण लोगों को कठिनाई होती है।
व्यवस्था और संवेदनशीलता पर उठे सवाल
इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या केवल नियमों का पालन पर्याप्त है, या ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण भी जरूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जो काम प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद कुछ घंटों में पूरा हो गया, वह पहले क्यों नहीं हो सका। वहीं, राज्य के एक मंत्री ने भी इस मामले में संवेदनशीलता की कमी की बात कही है और जांच के निर्देश दिए गए हैं।
आगे की कार्रवाई और जांच जारी
पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं। यह भी देखा जा रहा है कि प्रक्रिया में देरी क्यों हुई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई। इस घटना ने ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था में सुधार और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को फिर से उजागर किया है।