उत्तर प्रदेश

SmartMeter – तकनीकी खामी से उपभोक्ताओं का डाटा गायब, बढ़ी परेशानी…

SmartMeter – उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर पहले से चल रही बहस के बीच बुधवार को एक नई दिक्कत सामने आ गई, जिसने हजारों उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी। कई जिलों में अचानक स्मार्ट मीटर से जुड़ा उपभोक्ताओं का डाटा सिस्टम से गायब हो गया। इस तकनीकी गड़बड़ी के चलते लोग मोबाइल एप से स्वतः लॉगआउट हो गए और दोबारा लॉगइन करने की कोशिश करने पर ‘डाटा नॉट फाउंड’ का संदेश दिखाई देने लगा। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत और बैलेंस की जानकारी नहीं मिल सकी।

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ऐप में लॉगइन न होने से बढ़ी दिक्कत

दिनभर उपभोक्ता बार-बार एप में लॉगइन करने का प्रयास करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। लॉगइन प्रक्रिया के दौरान लंबे समय तक स्क्रीन पर लोडिंग होती रही और अंत में डाटा उपलब्ध न होने का संदेश आ जाता था। इस स्थिति में लोग यह समझ ही नहीं पाए कि उनके खाते में कितना बैलेंस बचा है और कितनी बिजली खर्च हो रही है। नतीजतन, कई उपभोक्ताओं ने एहतियात के तौर पर अनुमान के आधार पर अपने मीटर रिचार्ज किए, ताकि बिजली सप्लाई बाधित न हो।

मध्यांचल और पश्चिमांचल में ज्यादा असर

यह समस्या खास तौर पर मध्यांचल और पश्चिमांचल क्षेत्रों के उपभोक्ताओं के बीच अधिक देखने को मिली। बड़ी संख्या में लोगों ने शिकायत की कि दिनभर उन्हें अपनी बिजली से जुड़ी बुनियादी जानकारी नहीं मिल पाई। जिन उपभोक्ताओं के खाते में कम बैलेंस था, वे अधिक चिंतित नजर आए क्योंकि उन्हें अचानक बिजली कटने का डर सताता रहा।

प्रीपेड में बदले मीटरों पर भी सवाल

कई उपभोक्ताओं ने यह भी बताया कि उनके मीटर बिना स्पष्ट जानकारी या सहमति के प्रीपेड मोड में बदल दिए गए। इसके बाद से उनका डाटा एप में दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे मामलों में उपभोक्ता यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उनका खर्च किस आधार पर दर्ज हो रहा है। साथ ही, लॉगइन की समस्या ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

एकमुश्त रकम कटने की शिकायतें

कुछ उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनके खातों से अचानक एक साथ बड़ी राशि काट ली गई। इस पर बिजली विभाग के अधिकारियों ने सफाई दी है। पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा के अनुसार कुछ खातों में रोजाना की खपत के हिसाब से रकम नहीं कट रही थी। इसके बजाय एक तय अवधि के बाद एकमुश्त कटौती हो रही थी, जिससे उपभोक्ताओं को अचानक ज्यादा रकम कटने का अनुभव हुआ।

विभाग ने सुधार का दिया भरोसा

बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जहां-जहां से शिकायतें मिली हैं, उन्हें गंभीरता से लिया गया है और तकनीकी टीमों को समस्या दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक नितीश कुमार ने बताया कि सीमित स्थानों पर आई तकनीकी खामियों को ठीक कर लिया गया है और बाकी जगहों पर भी तेजी से सुधार कार्य जारी है।

उपभोक्ताओं में बनी अनिश्चितता

हालांकि विभाग ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन इस घटना ने उपभोक्ताओं के बीच भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्मार्ट मीटर प्रणाली को पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था, लेकिन बार-बार सामने आ रही तकनीकी समस्याएं इसे लेकर नई चिंताएं पैदा कर रही हैं। फिलहाल उपभोक्ता यही उम्मीद कर रहे हैं कि ऐसी दिक्कतें जल्द दूर हों ताकि उन्हें बिजली खपत और भुगतान से जुड़ी जानकारी आसानी से मिल सके।

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